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सवाल ये,आखिर सरकार से बाहर जाने के मूड क्यों है NCP?

| Jul 23, 2012 at 10:46pm | Updated Jul 24, 2012 at 12:08am

नई दिल्ली।यूपीए सरकार में कांग्रेस की सबसे मजबूत सहयोगी एनसीपी अब सरकार में रहेगी या नहीं इसी पर सवाल उठ खड़ा हुआ है। फिलहाल शरद पवार, प्रफुल्ल पटेल और अगाथा संगमा सरकारी कामकाज से दूर रहेंगे। कांग्रेस और यूपीए केंद्र में ही नहीं महाराष्ट्र सरकार में भी साझीदार हैं।दोनो पार्टियों का महाराष्ट्र का गठबंधन ज्यादा संवेदनशील है। सवाल ये है कि आखिर कांग्रेस का सबसे भरोसेमंद सहयोगी, सरकार से बाहर जाने के मूड में क्यों दिख रहा है?

सूत्रों की मानें तो रिश्तों में खटास की असली वजह महाराष्ट्र की राजनीति है। शरद पवार भले ही राष्ट्रीय कद के नेता माने जाते हों, लेकिन उन्होंने मराठा दिग्गज की अपनी छवि कभी टूटने नहीं दी। दरअसल, उनकी राजनीति महाराष्ट्र से चलती है। सूत्रों की मानें तो यूपीए में चल रहा मौजूदा संकट भी महाराष्ट्र से ही पैदा हुआ है। एनसीपी का आरोप है कि महाराष्ट्र और केन्द्र, दोनों ही जगह कांग्रेस एकतरफा फैसले ले रही है। एनसीपी की राय को कोई तवज्जो नहीं दी जाती फिर चाहे फैसला राज्यों में राज्यपाल को चुनने का हो या फिर महाराष्ट्र में डीएम की नियुक्ति का।

सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस एनसीपी में दरार की असली वजह मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चह्वाण का सिंचाई घोटाले पर दिया गया बयान है। दरअसल चह्वाण ने ये कहा था कि वो सिंचाई घोटाले के आरोप पर श्वेतपत्र लाएंगे। मुख्यमंत्री ने माना था कि पिछले दस सालों में सिंचाई पर 70 हजार करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं, जबकि सिंचाई के क्षेत्रफल में सिर्फ 0.1 फीसदी का इजाफा हुआ है। गौर करने लायक बात ये है कि पिछले दस साल सिंचाई विभाग एनसीपी के पास रहा है। 2009 के पहले तो ये विभाग पवार के भतीजे और राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के पास ही था। पृथ्वीराज चह्वाण की इस राजनीतिक गुगली से दोनों पार्टियों के बीच रिश्ते खराब चल रहे हैं। अब शरद पवार महाराष्ट्र में नेतृत्व परिवर्तन चाहते हैं। साथ ही, अपने नेताओं पर लग रहे आरोपों को खत्म करने का भी दबाव बना रहे हैं। महाराष्ट्र कांग्रेस का दावा है कि एनसीपी मुख्यमंत्री पर गलत आरोप लगा रही है।

बहरहाल, शरद पवार ने भी साफ किया है कि वो आखिरी फैसला महाराष्ट्र के एनसीपी नेताओं से राय-मशविरा करने के बाद ही लेंगे। लेकिन सवाल ये भी है कि क्या पवार ये सबकुछ सिर्फ महाराष्ट्र में नेतृत्व परिवर्तन के लिए कर रहे हैं, या फिर उनकी नजर 2014 चुनावों पर भी है। कहीं पवार कांग्रेस से दूरी बना कर अपने कंधों से सरकार की अलोकप्रियता का बोझ तो हटाना नहीं चाहते। क्योंकि ये पवार भी जानते हैं कि काफी उठापटक के बाद कांग्रेस को महाराष्ट्र में पृथ्वीराज चव्हाण के रुप में ऐसा मुख्यमंत्री मिला है जिसकी छवि साफ है और वो किसी भी हालत में इस वक्त नेतृत्व परिवर्तन का जोखिम नहीं उठाएगी।

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