आप यहाँ हैं » होम » मनोरंजन

रिव्यू: मजेदार फिल्म नहीं है ‘क्या सूपर कूल हैं हम’

| Jul 28, 2012 at 01:37pm | Updated Jul 28, 2012 at 03:05pm

मुंबई। अगर क्या सूपर कूल हैं हम’ फिल्म के हर शॉट को देखने पर हमें पैसे मिलते तो मैं इन पैसों से सिर्फ सर दर्द की दवा खरीदता क्योंकि फिल्म खत्म होने के बाद लोगों को इसकी जरूरत पड़ती।

फिल्म के साथ समस्या ये नहीं कि ये बेहूदी है बल्कि ये है कि ये बिल्कुल भी मजेदार नहीं है। इसके मुख्य किरदारों रितेश देशमुख और तुषार कपूर पर तो शर्म आती हैं क्योंकि इन्होंने सिर्फ भद्दे जोक्स मारने के अलावा कुछ नहीं किया है। फिल्म के लेखक और निर्देशक सचिन यार्दी (जिन्होंने 2005 में ‘क्या कूल हैं हम' भी लिखी थी) का इस फिल्म का एक ही मकसद नजर आता है इसे बहुत ज्यादा बेहूदा बनाना। फिल्म में कहानी और हंसी मजाक को बिल्कुल भुला दिया गया है।

फिल्म का प्लॉट भी कुछ खास नहीं है। फिल्म को एक सेक्स कॉमेडी की तरह देखते हुए इसे 'मस्ती' और 'क्या कूल हैं हम' से बिल्कुल भी फिल्म में बचकाने मजाक के अलावा शायद ही कुछ लाइनें होंगी जो आपको हंसाएं।

मैं इस फिल्म को पांच में से डेढ़ स्टार देता हूं। ये सिर्फ उन्हें ही थोड़ी बहुत पसंद आ सकती है जिन्होंने अमेरिकन पाई नहीं देखी है।

दूसरे अपडेट पाने के लिए IBNKhabar.com के Facebook पेज से जुड़ें। आप हमारे Twitter पेज को भी फॉलो कर सकते हैं।

ताजा चुनाव अपडेट पाने के लिए IBNkhabar की मोबाइल एप डाउनलोड करें।

IBNkhabar के मोबाइल वर्जन के लिए लॉगआन करें m.ibnkhabar.com पर!

अब IBN7 देखिए अपने आईपैड पर भी। इसके लिए IBNLive का आईपैड एप्स डाउनलोड कीजिए। बिल्कुल मुफ्त!

इसे न भूलें