अहमदाबाद। अहमदाबाद में योग गुरु बाबा रामदेव और मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी एक ही मंच पर नजर आए। मंच से मोदी ने रामदेव की जमकर तारीफ की। उधर, दो दिन के लिए गुजरात दौरे पर पहुंचे रामदेव ने अब तक मोदी के खिलाफ कुछ भी नहीं कहा है। यहां सवाल यह उठता है कि मोदी के साथ गलबहियां करने वाले रामदेव का साथ अन्ना कैसे ले सकते हैं? अन्ना को मोदी के साथ बाबा रामदेव के मंच पर होने की वजह से अपना स्टैंड साफ करना चाहिए?
अहमदाबाद पहुंचे रामदेव से जब राज्य में बीते 9 साल से लोकायुक्त न होने के बारे में पूछा गया तो जवाब मिला कि यह मोदी और उनकी सरकार का काम है, इसपर हम टिप्पणी नहीं करेंगे। यही रामदेव अन्य राज्यों में लोकायुक्त के मसले पर सरकार को घेरने से नहीं चूकते।

टीम अन्ना के अहम सदस्य संजय सिंह से जब मोदी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने साफ कहा कि टीम अन्ना मोदी की तारीफ सहन नहीं करेगी। जहां पर बीते 9 साल से लोकायुक्त न हो वहां के सीएम को समर्थन करने का प्रश्न ही नहीं उठता। वहीं जानकार मानते हैं कि मोदी के साथ गलबहियां कर लेने भर से टीम अन्ना रामदेव का साथ नहीं छोड़ने वाली। ऐसा करना उसकी मजबूरी भी है और जरूरत भी।
हालांकि अन्ना और रामदेव की राजनीतिक सोच बिल्कुल अलग है। अन्ना आंदोलन की शुरुआत के पहले से ही किसी भी राजनीतिक दल के समर्थक नहीं रहे जबकि स्वामी रामदेव अलग संगठन में होने के बावजूद कभी भी खुलकर बीजेपी-आरएसएस के खिलाफ नहीं उतरे हैं।
लेकिन क्योंकि टीम अन्ना को आंदोलन के स्वरूप के लिए रामदेव का साथ चाहिए। आंदोलन के विरोधी चाहते हैं कि अन्ना-रामदेव को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा किया जाए, ऐसे में टीम अन्ना कभी नहीं चाहेगी कि ऐसी कोई भी मंशा पूरी हो।
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