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देखें: अभूतपूर्व बिजली संकट में फंसा देश, घंटों ब्लैक आउट!!!

| Jul 31, 2012 at 01:46pm | Updated Aug 01, 2012 at 02:20pm

नई दिल्ली। एक बार फिर देश के 20 से ज्यादा राज्यों में तीन ग्रिड फेल होने की वजह से बिजली गुल हो गई। देश के 65 करोड़ लोगों की जिंदगी जहां की तहां ठप हो गई। सोमवार को भी यही हुआ था। तब सिर्फ 9 राज्यों की बिजली ठप हुई थी। लेकिन मंगलवार को तो बिजली की स्थिति भयावह हो गई। केंद्र का कहना है कि राज्यों ने अपने कोटे से ज्यादा बिजली ली इस वजह से ऐसा हुआ। देर रात तक धीरे-धीरे हालात सामान्य करने की कोशिश की जा रही थी।

शुक्रवार के दोपहर एक बजकर 10 मिनट हुए थे कि तभी अचानक हाहाकार मच गया। एक बाद एक 22 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों की बिजली गुल हो गई। 65 करोड़ लोगों पर सीधा असर हुआ। 65 करोड़ लोग बिना बिजली के अंधेरे में रहने को मजबूर हुए। 400 से ज्यादा ट्रेनें रुक गईं। अस्पताल ठप हो गए। पानी सप्लाई बंद हो गई। रेड लाइट बंद होने से सड़कों पर जाम लग गया। दिल्ली मेट्रो जहां की तहां ठहर गई। सरकारी संस्थानों में काम ठप हो गया। उद्योगों का चक्का रुक गया।

दो दिन में दूसरी बार ठीक ऐसा हुआ था लगा जैसे एक्शन रीप्ले हो लेकिन कुछ ही मिनट बाद समझ आया कि इस बार हाल कहीं ज्यादा बदतर हैं। सोमवार को सिर्फ 9 राज्यों की बिजली गुल हुई थी मंगलवार को 22 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में हाहाकार मचा हुआ था। केंद्र सरकार सकते में आ गई, बिजली मंत्री के होश उड़ गए। तीन ग्रिड एक के बाद एक फेल जो हो गए थे। कई घंटों तक सीधे सवालों से बचने के बाद मंत्री सुशील कुमार शिंदे सामने आए और राज्यों की बेईमानी को इस संकट का जनक करार दिया। कहा कि कई राज्यों ने अपने कोटे से ज्यादा बिजली खींची और इस वजह से ग्रिड फेल हो गया।

सरकार ने आज तक ऐसा संकट नहीं देखा था। देश में आज तक ऐसा संकट नहीं आया था। स्थिति गंभीर थी। जाहिर है इससे जल्द मुक्ति मिलने वाली नहीं थी। उत्तरी ग्रिड फेल होने की वजह से दिल्ली, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, राजस्थान में बिजली पूरी तरह से गुल हो गई। जबकि पूर्वी ग्रिड फेल होने की वजह से बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, सिक्किम की बिजली गुल हो गई।

वहीं उत्तरी ग्रिड के ठप होने का सीधा असर पूर्वी ग्रिड और उत्तर पूर्व ग्रिड के संतुलन पर पड़ा, ये दोनों ग्रिड भी गड़बड़ा गए और बंगाल से लेकर पूर्वोत्तर की बिजली बुकबुकाने लगी। उत्तर पूर्वी ग्रिड फेल होने की वजह से असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, नागालैंड, मिजोरम, त्रिपुरा, मेघालय में बिजली ठप हो गई। हालांकि इन उत्तर पूर्वी राज्यों में जल्द ही बिजली बहाल की गई। लेकिन सबसे बुरा हाल था उत्तर भारत का।

उत्तर प्रदेश में तो सभी नौ पावर प्लांट्स में बिजली उत्पादन ठप हो गया। ये सभी प्लांट कुल मिलाकर करीब 3000 मेगावाट बिजली पैदा करते हैं लेकिन ये उत्पादन भी ठप हो गया। राज्य में हाहाकार मच गया।

इस आफत में सबसे बुरी तरह से फंसे थे इन 22 राज्यों से सफर करने वाले ट्रेन यात्री। 400 से ज्यादा ट्रेनें जहां की तहां रुक गईं। इसमें राजधानी और शताब्दी जैसी वीआईपी ट्रेनें भी थीं। लाखों यात्री बीच रास्ते में फंस गए। जिन्हें ट्रेनें पकड़नी थीं वो इंतजार करते रह गए। दिल्ली, लखनऊ, पटना, कोलकाता, चंडीगढ़ कोटा, जयपुर जैसे महत्वपूर्ण स्टेशनों पर ट्रेनों का आवागमन बंद हो गया। लाखों यात्रियों को स्थिति की सही जानकारी भी नहीं मिल पा रही थी। स्टेशन पर उन्हें सिर्फ माइक से बिजली नहीं होने पर ट्रेनें लेट होने का एनाउंसमेंट ही सुनाई दे रहा था। लेकिन कौन सी ट्रेन कब आएगी ये पता ही नहीं चल पा रहा था। उत्तर भारत के हर स्टेशन पर अफरातफरी का माहौल था।

रेलवे ने आनन फानन में कदम उठाते हुए ट्रैक पर खड़ी कई ट्रेनों के लिए डीजल इंजन का इंतजाम किया। सोमवार से ही लेट चल रही ट्रेनों को डीजल इंजन भेजकर पास के स्टेशन पर पहुंचाया गया ताकि खाने पीने की समस्या को दूर किया जा सके।

रेलवे ने भरोसा दिया कि स्थिति पर जल्द ही काबू कर लिया जाएगा।

स्थिति सोमवार से भी गई गुजरी हो गई थी। अस्पतालों की बिजली गुल होने की वजह से मरीजों के इलाज में भारी समस्याएं सामने आ रही थी। दिल्ली के एम्स और सफदरजंग जैसे बड़े अस्पताल तो पावर बैकअप पर चल रहे थे। लेकिन कई छोटे सरकारी अस्पतालों में मरीजों की दिक्कत का सामना करना पड़ा। जयपुर के एसएमएस अस्पताल के मरीजों का हाल बुरा था।

बिजली की दिक्कत की वजह से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तो छुट्टी का ऐलान कर दिया। यहां भी कोलकाता में चलने वाली मेट्रो जहां की तहां ठप हो गई। लोगों को काफी मुश्किल से बाहर निकाला गया। जबकि दिल्ली की मेट्रो का भी हाल यही था। सड़कों पर रेडलाइट ना होने की वजह से यहां भयानक जाम भी लगा।

रात नौ बजे तक पावर ग्रिड कॉरपोरेशन के मुताबिक हालात पर बहुत हद तक काबू पा लिया गया। नॉर्दर्न ग्रिड में 80 फीसदी तक बिजली चालू करने का दावा पावर ग्रिड ने किया जबकि पूर्वी ग्रिड के 45 फीसदी हिस्सों में ही बिजली की सप्लाई हो सकी। जहां तक नॉर्थ ईस्टर्न ग्रिड का सवाल है तो यहां 100 फीसदी बिजली की सप्लाई शुरू हो गई। दिल्ली में 90 फीसदी बिजली की सप्लाई होने लगी।

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