CJ: वाराणसी में धड़ल्ले से जारी है रसोई गैस की कालाबाजारी

| Aug 01, 2012 at 07:57pm

वाराणसी। रसोई गैस हर घर की मूल जरूरतों में से एक है और अक्सर इसकी कमी की वजह से लोगों को बेहद परेशानी उठाना पड़ती है। ये सब जानते हैं कि ज्यादातर कालाबाजारी की वजह से गैस सिलेडरों की किल्लत होने लगती है। वाराणसी में अनिल मौर्या इस धांधली का सच सामने रखने के लिए सिटिज़न जर्नलिस्ट बने हैं।

सिटिजन जर्नलिस्ट अनिल मौर्य बताते हैं कि वाराणसी में रसोई गैस वितरण में बड़े पैमाने पर धांधली हो रही है जिससे आम लोग बेहद परेशान हैं और भ्रष्टाचारियों की चांदी कट रही है। अनिल ने 2 साल पहले रसोई गैस मिलने में काफी परेशानी हुई। उन्होंने तीन बार बुकिंग कराई, लेकिन डिलिवरी नहीं आई। पूछताछ के लिए जब भी वो एजेंसी जाते थे तो उनसे कहा जाता कि गैस सिलेंडर की अभी कमी है। उन्होंने परेशान होकर फैसला किया कि वो पता लगाएंगे कि आखिर उनके हिस्से का सिलेंडर कहां गया।

RTI डालने के 25 दिन बाद गैस एजेंसी वाले अनिल के पास आए और उन्हें भरोसा दिलाया कि आगे से कोई परेशनी नहीं होगी। उनका मसला सुलझते देख, उनके पड़ोसी उनके पास गए और उनसे मदद मांगने लगे तब उन्होंने गैस कंपनी से सूचना के अधिकार के तहत जानना चाहा कि वाराणसी जिले की सभी एजेसिंयों ने पिछले तीन महीने में कितनी बुकिंग की हैं। कितने लोगों के डिलिवरी दी गई है और इन्हें प्लांट से कितने सिलेंडर मिले हैं। RTI के जवाब में उन्हें सेल्स ऑफिसर से मिलने के लिए कहा गया। सेल्स ऑफिसर ने उनसे कहा कि वो सुविधा अनुसार खुद एजेंसियों में जाकर जांच कर सकते हैं।

अनिल 16 अगस्त 2011 को पहली बार एक गैस एजेंसी गए। काफी मशक्कत के बाद उन्हें रिकॉर्ड दिखाया गया। कागज़ात में तीन महीने में 39000 बुक दिखाई गई। प्लांट से 41418 सिलेंडर मिले, लेकिन डिलिवरी 38000 सिलेंडरों की हुई। सवाल था कि आखिर बचे हुए सिलेंडर कहां गए। लोग बताते हैं कि सिलेंडर वितरण में धांधली कर सिलेंडर ब्लैक में बेचे जाते हैं।

जब अनिल ने सेल्स ऑफिसर से शिकायत की कि आखिर ये अनियमितता क्यों है। साथ ही उन्होंने इस बारे में कंपनी के अन्य तीन बड़े अधिकारियों को भी पत्र लिखा। आज तक उस शिकायत का कहीं से कोई जवाब नहीं आया है। जब अनिल ने देखा कि कंपनी के अधिकारी उनका सहयोग नहीं कर रहे हैं, तो उन्होंने मुख्य सतर्कता आयुक्त को इस धांधली के बारे में लिखा। सीवीसी को लिखे पत्र से सभी घबरा गए और सेल्स ऑफिसर खुद उनके पास गए और बोले कि वो शिकायत वापस ले लें। अनिल ने शिकायत वापस लेने से इनकार कर दिया। इसका असर ये हुआ कि जब दूसरी गैस एजेंसी पर जांच के लिए वो गए तो उन्हें बहुत परेशान किया गया।

वाराणसी में इंडियन ऑयल की 22 एजेंसियां है। जिस पहली एजेंसी के रिकॉर्ड की उन्होंने जांच की, उसमें उन्हें गड़बड़ी नज़र आई। बाकी वितरण एजेंसियों में भी धांधली होने की आशंका है। अनिल कहते हैं कि अभी उन्होंने सिर्फ एक एजेंसी की जांच कर कागजात सतर्कता आयुक्त को भेजे हैं और लोग परेशान होने लगे। जब वो सारी जानाकारी जुटा लेंगे तो उन्हें भरोसा है, एक बड़े भ्रष्टाचार से पर्दा उठेगा।

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