नई दिल्ली। नये केन्द्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने देश की अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने, निवेशकों के अनुकूल माहौल बनाने, वित्तीय मजबूती और महंगाई को काबू में करने के लिए आज खाका पेश किया।
एक अगस्त को वित्तमंत्री का पदभार संभालने के बाद चिदंबरम ने अपने पहले संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सरकार अधिक से अधिक निवेश के लिए निवेशकों के अनुकूल माहौल बनाने, कर कानूनों में स्पष्टता, पूंजी प्रवाह बढ़ाने, निर्यात में बढ़ोतरी और वित्तीय मजबूती के लिए कदम उठाने के साथ-साथ महंगाई को काबू में करने के लिए भी अधिक कारगर उपाय करेगी।

उन्होंने कहा कि सरकार जल्दी ही वित्तीय मजबूती का खाका पेश करेगी। उन्होंने कहा कि वह स्पष्ट कर देना चाहते हैं वित्तीय बोझ का सभी तबको पर न्यायोचित भार डाला जाना चाहिए। गरीबों पर इसका बोझ नहीं पढ़ें किंतु अन्य पर यह भार निष्पक्ष रूप से उनके हिस्से के रूप में डाला जाए।
वित्तमंत्री ने कहा कि डॉ. विजय केलकर, डॉ. इंद्रा राजारमण और डॉ. संजीव मिश्रा वित्तीय मजबूती का खाका तैयार करने के लिए सरकार की मदद करेंगे और उम्मीद है कि अगले कुछ वर्षों में यह कार्य पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार कीमतों में स्थिरता लाने के लिए हरसंभव कदम उठाएगी। अखाद्य महंगाई नीचे आई है और उन्हें विश्वास है कि महंगाई भी मध्यकालिक अवधि में नीचे आएगी।
चिदंबरम ने वर्तमान में ऊंची ब्याज दरों का जिक्र करते हुए कहा कि इस दिशा में सरकार उचित कदम उठाएगी। तेज विकास गति को फिर से हासिल करने के लिए घरेलू और विदेशी निवेशकों से अधिक से अधिक निवेश आकर्षित करने पर जोर रहेगा। इसके लिए निवेशकों के मस्तिष्क से आशंका अथवा अविश्वास को दूर किया जाएगा। कर कानूनों में स्पष्टता और स्थिर कर ढांचा बनाया जाएगा।
विनिमय दर में उठापटक को कम करने के लिए प्रत्यक्ष विदेश निवेश (एफडीआई) और विदेशी संस्थागत निवेश(एफआईआई) की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। उच्च निवेशक के लिए पूर्वस्तर उच्च स्तर की बचत को बढ़ावा देने के लिए उपाय होंगे। चिदंबरम ने कहा कि विनिर्माण और निर्यात में मंदी अथवा नकारात्मक रुख को बदलने के लिए अल्पकालिक और मध्यकालिक उपाय किए जाएंगे।
बुनियादी सुविधाओं की परियोजनाओं की रास्ते में आने वाली अड़चनों को दूर किया जाएगा। कोयला, खनन, पेट्रोलियम, ऊर्जा, सड़क परिवहन, रेलवे और बंदरगाह क्षेत्रों की समस्याओं को दूर किया जाएगा जिससे कि उत्पादन बढ़ाने में मदद मिले।
उन्होंने माना कि दक्षिण-पश्चिम मानसून उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा है और कई राज्यों में सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। इस स्थिति में सरकार का यह कर्तव्य है कि वह लोगों को राहत मुहैया कराए, रोजगार बचाए और कृषि उत्पादन को बचाने के लिए हरसंभव उपाय करे।
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