नई दिल्ली। गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे को सिनेमा के लोगों की समझ पर शक है। असम हिंसा के मुद्दे पर राजसभा में अपने जवाब के दौरान समाजवादी पार्टी सांसद जया बच्चन की टोका-टाकी से नाराज शिंदे ने कह दिया कि ये गंभीर मसला है, फिल्म का मामला नहीं है। उनकी इस टिप्पणी पर हंगामा मच गया। शिंदे को बाकायदा माफी मांगकर अपने शब्द वापस लेने पड़े।
लेकिन बात यहीं खत्म नहीं हुई। असम हिंसा के मसले पर शिंदे के जवाब से भी, विपक्ष खासा असंतुष्ट दिखा और उसने उनकी काबलियत पर ही सवाल खड़े कर दिए। बीजेपी नेता रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि असम पर होम मिनिस्टर के कल और आज के जवाब से उनकी क्षमता पर सवाल खड़ा होता है।

हाल ही गृह मंत्रालय की कमान दिए जाने के साथ ही शिंदे को प्रणब मुखर्जी की जगह लोकसभा में सदन के नेता की ज़िम्मेदारी भी दी गई है। लेकिन बुधवार को लोकसभा में हुए हंगामे के दौरान सदन के नेता के तौर पर वो कतई असरदार नहीं दिखे। लोकसभा में असम हिंसा पर चर्चा के दौरान विपक्ष की ओर से उठे सवालों का भी जवाब उनके पास था। उन्होंने बस लिखा-लिखाया जवाब पढ़ दिया।
हाल ही उत्तरी ग्रिड फेल होने से आधे देश की बिजली गुल होने के बाद भी शिंदे की काबलियत पर सवाल उठे थे। शिंदे उस वक्त बिजली मंत्री थे लेकिन शिंदे के कंधे पर आलाकमान का हाथ है लिहाजा कांग्रेस पार्टी को उनमें कोई कमी नज़र नहीं आती।
कांग्रेस प्रवक्ता रेणुका चौधरी ने कहा कि ये कोई सर्कस नहीं है जो परफोरमेंस देखी जाए। शिंदे ने अभी काम संभाला है। उनकी काबिलियत पर सवाल उठाना ठीक नहीं। कांग्रेस पार्टी जो कहे, लेकिन शिंदे के पुराने रिकॉर्ड और हालिया प्रदर्शन ने उन्हें कठघरे में खड़ा कर दिया है। ऐसे में सवाल ये है कि देश की हिफाजत से जुड़े, बेहद अहमियत वाले गृह मंत्रालय की कमान वो कितनी काबिलियत से संभालेंगे।
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