नई दिल्ली। संजू बाबा ने राजनीति में कदम क्या रखा दिन पर दिन उनकी मुसीबतें बढ़ती ही जा रही हैं। अब मुन्नाभाई ने कैमरे के सामने कह डाला कि लड़कियों को शादी बाद अपने मां-बाप का सरनेम नहीं इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। मुन्नाभाई की इस राय को हमारे कुछ रीडर्स ने सिरे से खारिज कर दिया है जबकि कुछ का मानना है कि संजू ने जो कहा सही कहा।
गाजियाबाद से सुनील लिखते हैं कि क्या प्रिया दत्त उसी मां-बाप की संतान नहीं हैं जिसके संजय दत्त हैं जब दोनों एक ही मां-बाप की विरासत के वारिस है तो यह भेदभाव क्यों? वो आगे लिखते हैं कि बेटा कुल चलाने वाला कहा जाता है, पर वही अपने पिता का नाम हर जगह से कटवाकर अपना नाम लिखवाता है। असली वंशज तो बेटी ही होती है जो दोनों कुलो का वंश चलाती है,। इसलिए प्रिया दत्त को पूर्ण अधिकार है कि वह अपने स्वर्गीय पिता का नाम इस्तेमाल करें क्योंकि उन्होंने सुनील दत्त जी की प्रतिष्ठा पर कोई दाग नहीं लगाया है।
वहीं रोपड़ से कंवलजीत सिंह लिखते हैं कि लड़कियों को शादी के बाद अपने पति का सर नेम ही लगाना चाहिए क्योंकि उसका असली घर तो उसकी ससुराल ही होता है। दूसरी ओर मुरैना से रीता सिंह तोमर लिखती हैं कि संजय जी का कहना सही है। यही भारतीय संस्कार हैं और लड़की ससुराल में ही शोभा देती है। स्व. इंदिरा गांधी, सोनिया गांधी, स्व. राजमाता श्रीमंत विजया राजे सिंधिया जैसे कई राजनीतिक उदाहरण हैं जिनका नाम मात्र स्मरण से भारत की नारीयां गौरान्वित अनुभव करती हैं ।
उधर एमएनएस के उत्तर प्रदेश दिवस के विरोध पर रीडर दो राय नजर आ रहे हैं। कुछ का मानना है कि सबको अपने ही प्रांत में ऐसा करना चाहिए जबकि कुछ की राय है कि एमएनएस ऐसा कर सिर्फ राजनीतिक रोटियां सेक रही है और कुछ नहीं।
चलते-चलते: आईबीएन खबर पर इस बार पाक की मुंबई हमलों से जुड़ी जांच को लेकर असली मंशा पर सवाल पूछा गया। लोगों से पूछा गया कि क्य़ा पाक भारत द्वारा दिए जाने वाले सबूतों को फिर नकार देगा? इस पर 87 फीसदों ने हां में जवाब दिया है जबकि 11 फीसदी रीडर्स को लगता है कि पाक वाकई गंभीर है जबकि 2 फीसदी मानते हैं कि इस सवाल पर हां या न नहीं दिया जा सकता।
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