बैंगलोर। कारपोरेट मामलों के केंद्रीय मंत्री वीरप्पा मोइली ने कहा है कि कोयला खदानों के आवंटन में 1.8 लाख करोड़ रुपए के घोटाले के लिए केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार को जिम्मेदार बताने वाले नियंत्रक और महालेखा परीक्षक(कैग) की रिपोर्ट को अंतिम नहीं माना जा सकता है।
मोइली ने एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से कहा कि कैग की रिपोर्ट का आधार ही अलग होता है और वह वास्तविकता से बहुत दूर होती है। उन्होंने कहा कि कोयला मंत्रालय ने जो भी कदम इस दिशा में उठाए हैं उनमें पूरी तरह से कानून का पालन किया गया है।

कैग की संसद में शुक्रवार को पेश रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया में मोइली ने कहा कि यूपीए सरकार बेहतर प्रशासन के लिए तरीके में बदलाव ला रही है। हमें प्रशासन को और पारदर्शी बनाना है और इसके लिए कैग सहित सभी संस्थानों की सिफारिशों पर विचार किया जा रहा है। विपक्षी भारतीय जनता पार्टी द्वारा कोयला खदानों के आवंटन के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को जिम्मदार ठहराने और इस पर उनसे इस्तीफा मांगने के बारे में पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि जिसमें गलत हुआ ही नहीं है। ऐसे सभी मामलों के लिए प्रधानमंत्री को जिम्मेदार ठहराना ठीक नहीं है।
उन्होंने कहा कि कैग की रिपोर्ट को अंतिम नहीं माना जा सकता है क्योंकि इसे स्वीकार किया जा सकता है और नकारा भी जा सकता है। उन्होंने कहा कि लोकलेखा समिति को इस रिपोर्ट पर अभी विचार करना है और समिति को इसे अभी इसे स्वीकार करने अथवा अस्वीकार करने पर विचार करना है।
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