नई दिल्ली (राजीव मसंद की पसंद)। अपने सामने खड़ी किसी भी लड़की के साथ सेटल होने के बजाए ये 45 साल का कुंवारा फरहाद सिर्फ प्यार के लिए ही शादी करना चाहता है। नई निर्देशिका बेला भंसाली सहगल की ‘शीरीन फरहाद की तो निकल पड़ी’ में सेल्समैन के किरदार में बमन इरानी मुंबई की एक पार्सी कॉलोनी में अपनी बूढ़ी मां के साथ रहता है। उसका जॉब हमेशा उसकी शादी में रोड़े डालता है पर जब उसे फराह के रुप में अपनी साथी शीरीन मिल जाती है तो उसकी मां बीच में आ जाती है।
हद से ज्यादा प्यारा और रोमांटिक हुए बिना शीरीन फरहाद काम करती है क्योंकि बेला इस साधारण सी कहानी को बड़े ही सादे तरीके से बताती हैं। फिल्म आधारित है प्यार के खिलाफ मां बाप जो कि कुछ नया नहीं है पर संजय लीला भंसाली और बेला के भाई इस घिसे पिटे फॉरमूला को एक अधेड़ उम्र की जोड़ी से जोड़ कर एक नया चेहरा देते हैं।

पार्सी लोगों के बीच घूमती ये कहानी एक नया सा एहसास देती है और सारे ही किरदारों से आपको कुछ ना कुछ मजेदार मिलेगा। अच्छी बात ये है कि बेला ने फिल्म में असली पार्सी लोगों से काम करवाया है जो फिल्म को एक असली पहचान देता है।
फिल्म के सबसे बड़े आकर्षण हैं बमन और फराह जो अपनी अदाकारी से किरदारों में जान डालते हैं। इस जोड़ी की केमिस्ट्री काफी मजेदार है पर कहीं ना कहीं शीरीन फराहद काफी ज्यादा ही मेलोड्रामा लाते हैं और कुछ हिस्से काफी बचकाने लगते हैं।
फिल्म में गानों की भरमार है जो फिल्म की सिर्फ लंबाई बढ़ाने के लिए ही हैं। मैं निर्देशक बेला सहगल की फिल्म को पांच में से तीन स्टार देता हूं। ये दिल से बनाई हुई एक मजेदार फिल्म लगती है। इसे एक मौका दीजिए आप निराश नहीं होंगे।
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