जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर समेत कई जिलों में भारी बारिश और बाढ़ ने जमकर तबाही मचाई है। राजस्थान में अब तक 34 लोगों की मौत हो चुकी है। एक लाख से ज्यादा लोग बेघर हो गए हैं, जबकि करीब 15 हजार लोगों ने राहत शिविरों में शरण ले रखी है। लेकिन राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत जनता का दुख दर्द बांटने की बजाय ये कह रहे हैं कि जयपुर में बाढ़ नहीं आई है। उनका कहना है कि बाढ़ तो तब आती है जब शहर डूब जाता है और नावें चलने लगती हैं।
दरअसल दो महीने की एक मासूम की आंखें अपनी मां को तलाश रही हैं। 21 अगस्त को जब इसकी तबीयत बिगड़ी तो बच्ची के पिता राममोहन और मां पूजा नाटाणी ने उसे जयपुर के जेके लोन अस्पताल में भर्ती करा दिया। रात करीब 11 बजे जब दोनों घर से अस्पताल आ रहे थे तो तेज बारिश से आई बाढ़ में जयपुर-आगरा रोड पर दोनों कार सहित बह गए और मौत हो गई। शहर की सीतारामपुरा कॉलोनी की हिना और रुबीना भी इस बाढ़ को कभी नहीं भूल पाएगी। दोनों के यहां शादी की तैयारियां चल रही थीं लेकिन अमानीशाह नाले में आई बाढ़ में शादी का सामान समेत घर की सारी चीजें पानी में बह गईं।

जयपुर में ही राजीव नगर बस्ती की रहने वाली आमना का घर भी आफत की बारिश में बह गया। फिलहाल बीमार पति अब्दुल रहमान को लेकर चार दिन से राहत शिविर में रह रही है। अब्दुल की सेहत घर टूटने के सदमें से इतनी बिगड़ गई कि उसकी जबान और शरीर दोनों कांप रहे हैं।
21 अगस्त को हुई रिकॉर्ड बारिश के बाद जयपुर की कई बस्तियां चौथे दिन भी पानी में डूबी हैं, अकेले जयपुर मे 15 हजार से ज्यादा लोग बेघर होकर राहत शिविरों में है। यही हाल सीकर, लक्ष्मणगढ़, नवलगढ़ और लूणकरणसर के हैं। जयपुर समेत एक दर्जन से ज्यादा जिलों में करीब एक लाख लोग छोटे नदी नालों में आई बाढ़ से बेघर हो गए। कहीं क्रेन से लोगों को निकाला गया, तो कहीं नाव और रस्सियों की मदद से सुरक्षित बचाया गया। बारिश की वजह से पूरे राजस्थान में अब तक 33 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी हैं। सबसे ज्यादा 10 मौत अकेले जयपुर में हुई हैं। इसके अलावा सीकर, भीलवाड़ा, चुरू, भरतपुर, दौसा, सवाईमाधोपुर, अलवर, धौलपुर, झुंझनूं और अजमेर में भी बारिश ने लोगों की जान ली है। जयपुर समेत पूरे राजस्थान में पानी का सैलाब कहर बरपा रहा है लेकिन शर्म की बात ये है कि सूबे के मुखिया अशोक गहलोत को ये सब नजर नहीं आ रहा। किसी और शहर का हाल जानना तो दूर, मुख्यमंत्री जी ने अभी तक राजधानी जयपुर में ही किसी बस्ती में जाकर पीड़ितों का दर्द सुनना जरूरी नहीं समझा। गहलोत ने ये कहकर पीड़ितों के जख्म पर और नमक छिड़क दिया कि सूबे में ना तो कहीं बाढ़ आई और ना ही कोई डूबा है।
लेकिन विपक्ष ही नहीं, सत्तारुढ़ कांग्रेस के ही विधायक सीएम के इस दावे को गलत बता रहे हैं। हैरानी है राजस्थान में करीब एक लाख लोग पानी के इस कहर से बिलख रहे हैं, हजारों अभी भी मदद का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन सूबे की सरकार कॉलोनियों से पानी निकालने के लिए चार दिनों में पंप तक का इंतजाम नहीं कर पाई। वहीं, राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पानी से प्रभावित इलाकों में जाने के बजाय बाड़मेर चले गए। जहां 30 अगस्त को बाड़मेर में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी एक परियोजना के शिलान्यास करेंगी।
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