जयपुर। जयपुर शहर इस समय पानी पानी है। 58 लोगों की जान ले चुका ये पानी अब महामारी भी फैला रहा है। लेकिन सवाल ये है आखिर ऐसी कौन सी नौबत आ गई कि महज भारी बारिश ने इतनी पड़ी त्रासदी पैदा कर दी। आईबीएन7 को पता चला है कि इसके पीछे की वजह राजनेता, अधिकारियों और बिल्डरों का गठजोड़ है।
जिन इलाकों मे बाढ़ के हालात बने ये सभी इलाके अवैध रुप से या सरकारी मिलिभगत से बसी बस्तियां हैं। इस पूरे मामले में खुद मुख्यमंत्री पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। हालात से घबराई सरकार ने अब डूबे क्षेत्रों में बिजली,पानी के कनेक्शन पर रोक लगा दी है।

जयपुर के प्रेम नगर में 22 अगस्त की रात को आई बारिश के बाद आपदा प्रबंधन की टीम को लाइफ जैकेट बांध कर लोगों को सुरक्षित निकालना पड़ा। जिन रास्तों पर कारें फर्राटें भरती थी वहां लोग कमर तक पानी में डूबकर सड़कें टटोल रहे थे। घर-घर में स्वीमिंग पूल जैसे नजारे पैदा हो गए।
शहर के पॉश इलाके श्याम नगर में अमानीशाह नाले के ऊपर ही मल्टी स्टोरी बिल्डिंग तैयार हो रही है। जिसे सरकार की मेहरबानी के बाद जयपुर विकास प्राधिकरण के अफसरों ने भी पट्टे पर दे दिया। जाहिर है नाले का बड़े हिस्सा और बहाव क्षेत्र पर न सिर्फ कब्जा कर लिया गया बल्कि इसे मिट्टी और दीवार से भी पाट दिया। इससे नाले पर इतना पानी जमा हो गया कि दो ट्रक नाले में बह गए और हादसे को रोकने के लिए पुलिस तक तैनात करनी पड़ी। इसके बाद नाला इतना संकरा हो गया कि इसमें गंदा पानी समा न सका और फिर बहता हुए पानी ने पांच सौ मीटर दूर ही एक कॉलोनी को डूबो दिया।
मालूम हो कि अशोक गहलोत ने अपने पिछले कार्यकाल यानी 2001 में ही अमानीशाह नाले की 23,176 वर्गगज सरकारी जमीन का नियमन कर ये जमीन एक बिल्डर को आंवटित कर दी। जयपुर को दो हिस्सों में बांटने वाला अमानीशाह नाला तीस साल पहले द्रव्यवती नदी था, नाले की लंबाई करीब 40 किलोमीटर है, लेकिन चौड़ाई तीस साल में भी तय नहीं हो पाई है। इन तीस सालों में कई कमेटियां और एजेंसिया नाले की चौड़ाई तय करने के लिए बनाई गईं, लेकिन भ्रष्ट अफसरों और भू-माफिया के गठजोड़ के आगे किसी की नहीं चली। फिलहाल राजस्थान हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के चलते नाले की न्यूनतम चौड़ाई 150 फीट तय की गई है लेकिन हकीकत में हाईकोर्ट का यह आदेश भी बेअसर है। कई जगह नाला महज पांच मीटर ही है।
इसके बाद भी सरकार ने भू-माफियाओं को फायदा देने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी और चौड़ाई की सीमा को दरकिनार कर भूमाफियां की जमीनों का नाले पर ही नियमन कर दिया। जाहिर है खद्दरधारियों, सरकारी अधिकारियों और भूमाफिया के इस गठजोड़ का खामियाजा यहां के आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
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