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राहुल गांधी पर सवाल से कांग्रेस तिलमिलाई, विपक्ष हमलावर

| Sep 12, 2012 at 06:26pm | Updated Sep 12, 2012 at 07:52pm

नई दिल्ली। इंग्लैंड की मशहूर पत्रिका 'द इकॉनमिस्ट' में राहुल गांधी पर छपी एक टिप्पणी से कांग्रेस सकते में है। पार्टी ने लेख को सिरे से खारिज करते हुए राहुल के प्रति अपनी आस्था दोहराई है। दूसरी ओर विपक्ष को राहुल पर हमले का एक और मौका मिल गया है। सपा ने राहुल को पीएम पद के अयोग्य बताया तो बीजेपी ने ब्रांड राहुल अस्तित्व में न होने की बात कही। दरअसल, डिकोडिंग राहुल गांधी' नाम की किताब के आधार पर 'द इकॉनमिस्ट' में छपा है कि राहुल बड़ी जिम्मेदारी से बचते है, क्योंकि उनमें जिम्मेदारी निभाने की भूख ही नहीं है।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर नकारात्मक टिप्पणी के बाद विदेशी मीडिया के निशाने पर अब हैं कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी। एक भारतीय लेखिका की किताब 'डिकोडिंग राहुल गांधी' के आधार पर 'द इकॉनमिस्ट' के एक ब्लॉग में लिखा गया है कि राहुल बड़ी जिम्मेदारी से बचते हैं, क्योंकि उनमें जिम्मेदारी निभाने की भूख ही नहीं है।

अपने युवराज पर हुए इस हमले से कांग्रेस तिलमिला गई है। पार्टी ने विदेशी मीडिया की टिप्पणियों को तूल देने की पद्धति को मानसिक गुलामी बता डाला। द इकॉनमिस्ट के ब्लॉग को सिरे से खारिज करते हुए पार्टी ने ऐलान किया कि गुजरात चुनाव में राहुल ही पार्टी का नेतृत्व करेंगे।

कांग्रेस पार्टी के आधिकारिक मंच से चुनावों पर ज़ोर इसलिए दिया गया क्योंकि द इकॉनमिस्ट ने लिखा है कि राहुल को 2014 के चुनावों के लिए अभी से तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। राहुल गांधी के साथ बड़ी समस्या यह है कि उन्होंने न तो अभी तक एक नेता के तौर पर अपनी योग्यता दिखाई है, और न ही बड़ी जिम्मेदारी के लिए उनके भीतर कोई तत्परता दिखती है। वो शर्मीले हैं। पत्रिका के अनुसार राहुल गांधी संसद में भी अपनी आवाज़ नहीं बुलंद करना चाहते, और कोई नहीं जानता है कि वो कितने काबिल हैं या फिर सत्ता और जिम्मेदारी मिलने के बाद वो आखिर क्या करेंगे।

सवाल ये है कि कांग्रेस पार्टी आखिर कब तक व्यावहारिकता पर आस्था का पर्दा डालती रहेगी। क्या ये सही नहीं कि बिहार और यूपी में राहुल के चुनावी प्रयोग बुरी तरह नाकाम हो चुके हैं। तमाम आग्रहों के बावजूद वो संगठन और सरकार में बड़ी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं हैं। तमाम विवादित और अहम मुद्दों पर बात करने से राहुल बचते हैं। सबसे बड़ी बात ये कि कांग्रेस पार्टी और सरकार में राहुल की अहमियत आखिर कम थी ही कब। उनके आग्रह और प्रस्ताव तो पहले ही आदेश की हैसियत रखते हैं।

विदेशी मीडिया में सवाल उठे तो समाजवादी पार्टी ने राहुल गांधी पर हमला बोला। पार्टी नेता मोहन सिंह ने कहा कि पिछले डेढ़ दो सालों में राहुल गांधी का ऐसा कोई बयान सुनने में नहीं आया जिससे पता चले कि वो किसी मसले पर गंभीर राय रखते हैं।

मोहन सिंह ने कहा कि राहुल गांधी गंभीर मामलों को हैंडिल करने में फिलहाल सक्षम नहीं लगते। राहुल गांधी कितने अच्छे पीएम साबित होंगे इसपर मोहन सिंह कुछ कहते हुए रुक गए और हंसते हुए कहा कि इसपर कभी व्यक्तिगत तौर पर मिलेंगे तो बात करेंगे।

वहीं बीजेपी ने भी कहा कि देश में ब्रांड राहुल जैसी कोई चीज नहीं है। पार्टी प्रवक्ता राजीव प्रताव रूडी ने कहा कि राहुल को पिछले आठ साल में कभी किसी बड़े मुद्दे पर बोलते हुए नहीं सुना गया। करप्शन, महंगाई पर राहुल ने कभी कोई शब्द नहीं बोला। न ही कोलगेट पर उनके विचार जनता के सामने आए।

रूडी ने कहा कि जो व्यक्ति 42 की उम्र में फिट नहीं है वो 52 की उम्र में कैसे फिट हो जाएगा। कोकराझार के दौरे पर देश के रक्षा मंत्री राहुल गांधी को एस्कॉर्ट्स सर्विस देते नजर आए।

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