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सुधारों का मतलब ये नहीं कि सबकुछ बेच डालें: ममता

| Sep 15, 2012 at 04:32pm

नई दिल्ली। यूपीए के घटक और सहयोगी दल केंद्र सरकार के फैसलों से बेहद नाराज हैं। 24 घंटे के अंदर यूपीए-2 सरकार ने कई अहम आर्थिक फैसले लिए हैं। डीजल और गैस के दाम में बढ़ोतरी के अलावा रिटेल, एविएशन, ब्रॉडकास्टिंग सर्विस में FDI के लिए दरवाजे खोल दिए हैं। मल्टी ब्रांड रिटेल में 51 फीसदी FDI के विरोध में तमाम सहयोगी दल सामने आ गए हैं। ममता बनर्जी, अखिलेश यादव और मायावती ने खुलेआम सरकार का विरोध शुरू कर दिया है। वहीं पीएम का कहना है कि देश की तरक्की के लिए साहस और जोखिम लेना जरूरी है।

ममता बनर्जी ने एक बार फिर अपने फेसबुक पेज पर एफडीआई का विरोध किया है। ममता ने कहा है कि हमें सुधारों की जरूरत है लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि कुछ लोगों को संतुष्ट करने के लिए हम सबकुछ बेच दें। लोकतांत्रिक ढांचे में सुधारों का फायदा गरीब और आम आदमी तक पहुंचना चाहिए और लोकतंत्र का तकाजा ही यही है कि हम आम आदमी के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझें।

ममता ने लिखा कि विकसित देशों में सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी कई स्कीमें हैं लेकिन हमारे देश में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है जिससे आम आदमी के हितों की रक्षा हो सके। कुछ एकतरफा फैसले सेंसेक्स को कुछ वक्त के लिए मजबूती जरूर देंगे। मैं मानती हूं कि सेंसेक्स को स्थिर रहना चाहिए। लेकिन साथ ही नीतियां बनाते वक्त हमें इस बात का ध्यान रखना होगा कि नीतियों से आम आदमी की कमर न टूटे।

ममता ने ये भी लिखा कि अगर देश के बाहर रखे काले धन को यहां ले आया जाए तो सेंसेक्स खुद ब खुद तेजी पकड़ लेगा। मैं ऐसे किसी भी फैसले का समर्थन नहीं करती जिसमें सबकुछ बेचने की बात की जाए।

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