नई दिल्ली। ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार से समर्थन वापस लेकर राजनीति की बिसात पर ऐसा पांसा फेंका है कि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी जैसे दलों को सांसत में डाल दिया है। अब मुलायम सिंह और मायवती जैसे नेताओं पर दबाव बढ़ गया है कि या तो वे सरकार से समर्थन वापस लें या फिर रिटेल में एफडीआई या डीजल मूल्य वृद्धि के विरोध का ड्रामा छोड़ दें।
ममता से प्रेसवार्ता में पूछा गया कि आपके मंत्री सरकार से इस्तीफा देंगे लेकिन क्या आप सरकार को बाहर से समर्थन देंगी तो टीएमसी अध्यक्ष ने कहा कि अगर सरकार को बाहर से समर्थन देना है तो समर्थन वापस लेने का क्या मतलब? उन्होंने कहा कि 20 सितंबर को होने वाले भारत बंद में उनकी पार्टी टीएमसी शामिल होगी।

ममता के इस बयान से सबसे ज्यादा दबाव मुलायम सिंह और मायावती पर आ गया है। अब या तो इन नेताओं को सरकार से समर्थन वापस लेना होगा या फिर इन्हें यूपीए सरकार की नीतियों का विरोध छोड़ना पड़ेगा। गौरतलब है कि ममता के समर्थन वापसी से अब मनमोहन सरकार मायावती और मुलायम सिंह यादव के समर्थन के बल पर ही जिंदा है।
समाजवादी पार्टी सांसत में है। उसका कहना है कि पार्टी 20 सितंबर के भारत बंद में हिस्सा लेगी उसके बाद अपने रुख का फैसला करेगी लेकिन उसका निर्णय स्वतंत्र होगा और ममता के निर्णय से प्रभावित नहीं होगा। पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव ने ये बात कही।
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