नई दिल्ली। वर्तमान हालात में वरिष्ठ समाजसेवी अन्ना हजारे और अरविंद केजरीवाल की राहें अलग-अलग हैं लेकिन अरविंद को उम्मीद है कि कुछ महीने बाद अन्ना उनके साथ होंगे। उनके मुताबिक अन्ना उनके दिल में रहेंगे।
अरविंद ने भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई और राजनीतिक पार्टी बनाने पर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि सभी राजनीतिक पार्टियों ने देश की संसद को ठगा है। इस वजह से उनको राजनीतिक पार्टी बनानी पड़ रही है। केजरीवाल ने कहा कि अन्ना का आशीर्वाद उनके साथ है। उन्होंने अन्ना के विचारों को आगे रखते हुए कहा कि अन्ना का कहना है कि राजनीति गंदी है लेकिन हमारा कहना है कि राजनीति में जाकर समाज में सुधार हो सकता है। जब अन्ना देखेंगे कि उनकी टीम सही काम कर रही है तो वो फिर से लौट आएंगे। वो देशभक्त हैं।

पार्टी बनाने के बाद चुनाव में उम्मीदवार उतारने के सवाल पर अरविंद ने कहा कि अन्ना के पैरामीटर पर हर उम्मीदवार को खरा उतरना होगा। अगर अन्ना कहेंगे कि उम्मीदवार खराब है तो उसे बदल देंगे। अरविंद ने कहा कि चुनाव जीतने के दस दिन के भीतर वे जनलोकपाल बिल पारित कर देते हैं तो तीन महीने के भीतर गलत चयनित उम्मीदवार पर कार्रवाई की जाएगी। और राइट टू रिकॉल लेकर आया जाएगा।
अन्ना को टीम में लाने के सवाल पर अरविंद ने कहा कि हमारे ऊपर नैतिक दबाव है कि हम अन्ना को फिर से टीम में लेकर आएं। अरविंद ने अन्ना और रामदेव की गुप्त बैठक के बारे में कहा कि उनको उस बैठक के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने इस संबंध में अन्ना से कोई बात नहीं की है।
एक सवाल के जवाब में अरविंद ने कहा कि जनता के लिए भ्रष्टाचार मुद्दा है। मीडिया के सामने अन्ना, अरविंद और रामदेव का मुद्दा। बिजली की बढ़ी दरों पर अरविंद ने कहा कि डीजल, पेट्रोल, पानी के दाम घटने चाहिए थे लेकिन बढ़ गए।
अरविंद ने शीला दीक्षित के बयान पर कि अरविंद केजरीवाल अराजकता फैला रहे हैं, कहा कि आदेश पारित हुआ था कि दिल्ली में 23 फीसदी बिजली के दाम घटने चाहिए। शीला दीक्षित ने आदेश पारित कर उस आदेश को रद्द कर दिया और नया आदेश पारित कर दिया कि बिजली के दाम 200 फीसदी बढ़ाए जाएं। तो अराजकता कौन फैला रहा है। एक रिक्शेवाला जो 6 हजार रुपये महीने कमाता है उसका बिजली का बिल दिया गया तीन हजार रुपये का। वो ये बिल कैसे भरेगा?
अरविंद ने बीजेपी पर हमला करते हुए कहा कि बीजेपी बताए कि उनको नहीं पता था कि 23 फीसदी बिजली के दाम घटाने का प्रावधान है। फिर उन्होंने सरकार से बिजली के दाम घटाने की मांग क्यों नहीं की। बीजेपी चुनाव के लिए काम करती है। देश के लिए नहीं करती। सत्ता में आने के बाद बीजेपी के लोग भी बिजली कंपनियों से घूस खाएंगे।
राजनीति में आने के सवाल पर अरविंद ने कहा कि वो सत्ता के अंदर सत्ता भोगने नहीं जा रहे हैं। वो सत्ता के केंद्र को ध्वस्त करके सत्ता को जनता के हाथ में सौंपने आ रहे हैं। देश में जनता के ऊपर निर्णय थोपे क्यों जाते हैं। जनता को निर्णय करने का अधिकार है।
शीला दीक्षित पर हमला करते हुए अरविंद ने कहा कि दिल्ली की सीएम बताएं कि उन्होंने क्यों रुकवाए बिजली के बिल 23 फीसदी कम करने के आदेश? दो हजार करोड़ की जमीन एक रुपये प्रति माह रेंट पर क्यों दे दी गई? शीला दीक्षित ये बताएं। सरकार जनता को क्यों नहीं दे देती जमीन?
राजनीतिक पार्टी बनाने पर अरविंद ने कहा कि दो अक्टूबर को उनकी पार्टी बन जाएगी। पार्टी का नाम तय हो जाएगा। इसके बाद भी आगे की तैयारियां जारी रहेंगी। पार्टी इस मामले में एक रूपरेखा लेकर सामने आएगी कि उम्मीदवार कैसे तय किे जाएं।
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