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एनडीए सरकार में बांटे गए कोल ब्लॉक भी जांचे जाएंगे

| Sep 24, 2012 at 06:29pm | Updated Sep 24, 2012 at 11:26pm

नई दिल्ली। सीवीसी के आदेश के बाद सीबीआई ने कोल ब्लॉक आवंटन मामले में जांच का दायरा बढ़ा दिया है। सीबीआई साल 1993 से हुए कोल ब्लॉक आवंटन की जांच करेगी। 1993 से 2012 के दौरान छह साल तक एनडीए का भी शासन रहा है। सूत्रों का कहना है कि इस जांच से और भी कई बड़े नाम सामने आएंगे। वर्तमान में जांच 2003 से हुए आवंटन की हो रही थी।

वहीं इस पर राजनीतिक पार्टियों की प्रतिक्रिया भी आने लगी है। बीजेपी नेता प्रकाश जावड़ेकरन का कहना है कि कांग्रेस साल 2003 से 2009 के बीच कोयला खदान आवंट से ध्यान हटाने के लिए 1993 से आवंटन की जांच करवा रही है। उन्होंने कहा कि इस जांच से बीजेपी को कोई परहेज नहीं है।

जावड़ेकर ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस नहीं चाहती कि सीबीआई आवंटन में हुए घोटाले की जड़ तक पहुंचे। दूसरी तरफ वाम खेमे से भी इस जांच पर सवाल उठने लगे हैं। डी राजा का कहना है कि कोल ब्लॉक आवंटन की प्रभावशाली जांच कब तक चलेगी, हमने तो जूडिशल जांच की मांग की थी। हम लोगों ने कोल ब्लॉक आवंटन में लाइसेंस रद्द करने की भी मांग की थी।

कांग्रेस नेता मनीष तिवारी का कहना है कि किसी व्यक्ति को जीरो लगा कर हीरो बनाने की आदत पड़ जाए तो क्या करें? कोल घोटाला हुआ है या नहीं ये बात चर्चा के बाद तय होगी। वहीं, कांग्रेस नेता सुबोधकांत सहाय ने कहना है कि कोल ब्लॉक की पूरी बहस झूठ की बुनियाद पर है।

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