नई दिल्ली। बीते एक दशक से भारतीय बल्लेबाजी की रीढ़ रहे सहवाग पर अब सवाल उठने लगे हैं। उनकी फिटनेस, धोनी से मतभेद, खराब प्रदर्शन उनकी आगे खेलने की उम्मीदों पर पानी फेर सकते हैं लेकिन वीरू का चौंका देने वाला प्रदर्शन इन सब पर भारी पड़ता नजर आता है। धोनी कह चुके हैं कि उनके सामने ये सबसे बड़ी समस्या ये होगी कि वो सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग को खिलाएं या नहीं। पेश हैं सहवाग को ट्वेंटी-20 विश्व कप के सुपर-8 दौर के आज भारत-ऑस्ट्रेलिया अहम मुकाबले में खिलाने या न खिलाने की कुछ अहम वजहें।
सहवाग के खेलने की वजहें

- युवराज सिंह भी अभी पूरी तरह से फार्म में नहीं दिख रहे है। ऐसे में सहवाग की जगह उन्हें टीम में शामिल करने का फैसला धोनी के लिए आसान नहीं होगा।
- वीरेंद्र सहवाग की फिटनेस पर सस्पेंस लगातार बना हुआ है। लेकिन सहवाग ने अंगूठे की चोट के बाद नेट पर लगभग आधे घंटे तक जमकर अभ्यास किया।
-अब तक 17 टी-20 मैच खेल चुके वीरेंद्र सहवाग ने 348 रन बनाए हैं। सहवाग का स्ट्राइक रेट 149 का है। यानी वो हर ओवर में करीब 9 रन बना देते हैं।
सहवाग के न खेलने की वजह
- वीरेंद्र सहवाग की फिटनेस पर सस्पेंस लगातार बना हुआ है। इंग्लैंड मैच से पहले उनको लगी चोट मामूली बताई गई थी। आधिकारिक तौर पर वो फिट बताए जा रहे हैं।
- धोनी ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाले मुकाबले में पांच गेंदबाजों को मैदान पर उतारने का फैसला किया है। इसका मतलब है कि उन्हें किसी एक बल्लेबाज को आराम देना होगा। लेकिन आराम सहवाग को देना है या युवराज को ये देखना होगा।
- सहवाग का ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ट्वेंटी 20 में रिकार्ड बहुत अच्छा नहीं है। उन्होंने पांच ट्वेंटी-20 मैचों में 8.20 के औसत से महज 41 रन ही जोड़े हैं।
- श्रीलंका के खिलाफ अभ्यास मैच सहवाग 12 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। जिससे सहवाग के प्रदर्शन को लेकर संशय के सवाल खड़े होने लगे हैं।
- टी-20 विश्व कप में फील्डिंग की बड़ी अहमियत होती है सहवाग 30 साल के उम्र की सीमा पार कर चुके हैं। उनकी साधारण फील्डिंग टी-20 और वनडे में टीम के लिए कई मौकों पर भारी भी पड़ती जा रही है
- विस्फोटक बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग और महेंद्र सिंह धोनी के बीच मनमुटाव की खबर हमेशा ही आती रही है। धोनी ने सहवाग को इंग्लैंड के खिलाफ मैच में बाहर बैठा दिया था।
- टीम इंडिया के सबसे विवादित कोच रहे ग्रेग चैपल ने कहा कि मुझे लगता है कि अब सहवाग के लिए अपनी आदतें बदलना आसान नहीं है। अगर धोनी और चयनकर्ता यह सोच लें कि अब सहवाग को और बर्दाश्त नहीं करना चाहिए तो टीम उनके बिना ट्वेंटी-20 विश्वकप जीतना भारत के लिए आसान हो सकता है।
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