नई दिल्ली। क्या आपने कभी सुना है कि आपके घर में पानी का बिल हजारों में आया हो। अगर नहीं तो दिल्ली की राजिंदर कुमार से पूछिए जिनके घर में महज तीन लोग रहते हैं लेकिन उनका पानी का बिल आया है 4 हजार रुपये का। यही हाल दिल्ली के हजारों लोगों का है।
राणा प्रताप बाग में रहने वाले डॉक्टर विश्वास नाथ को दिल्ली जल बोर्ड ने पूरे नौ हजार नौ सौ रुपये का बिल भेज दिया। डॉक्टर विश्वास नाथ को समझ में ही नहीं आया कि जब उन्होंने पहले की ही तरह पानी का इस्तेमाल किया है तो फिर सैकड़ों रुपयों में आने वाला बिल अचानक दस हजार का कैसे हो गया। उन्होंने दिल्ली जल बोर्ड के काफी चक्कर लगाए। बाबुओं से शिकायत की तब कई महीने बाद इनका बिल ठीक किया गया और फिर बिल आया महज 449 रुपये।

बिल में गड़बड़ी के सिर्फ विश्वास नाथ ही शिकार नहीं हुए। हरित विहार में रहने वाले उदयवीर ने अपने घर में पानी के कनेक्शन के लिए दो साल पहले आवेदन किया था। अब तक पानी का पाइप भी नहीं लगा है लेकिन इनके पास भी 6 हजार रुपये का बिल भेज दिया गया है। सवाल ये है कि आखिर कहां से पानी के बिल में इतनी बढ़ोतरी हो गई। आखिर क्यों दिल्ली के लोगों को अचानक हजारों रुपये के बिल आ रहे हैं।
पूछताछ में दो वजहें सामने आईं। एक तो दिल्ली जल बोर्ड ने महीने या दो महीने की जगह एक साथ एक साल का बिल भेज दिया ताकि स्लैब बदलने से बिल महंगे हो जाएं। दूसरा हर बिल के साथ एक सर्विस चार्ज भी जोड़ दिया जो कहीं-कहीं बिल से भी ज्यादा है। जाहिर है लोग तो भड़केंगे ही। अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं कि जहां खाने-पीने से लेकर रसोई गैस, डीजल, बिजली, रेल किराया और हर चीज महंगी हो रही है अगर वहां सरकार सुधार के नाम पर पानी के लिए भी हजारों रुपये वसूलने लगे तो फिर आम आदमी कहां जाए।
दिल्ली में सिर्फ पानी महंगा नहीं हुआ है बल्कि कनेक्शन लेना या कटाना भी काफी महंगा हो गया है। इसकी कहानी भी किसी और ने नहीं दिल्ली की कांग्रेस सरकार ने ही लिखी है। दिल्ली सरकार यानी शीला सरकार यानि की दिल्ली जल बोर्ड की चेयरपर्सन।
पानी के लिए नए कनेक्शन लेने की कीमत में मामूली बढ़ोतरी नहीं की गई बल्कि इसे दोगुना कर दिया गया। दिल्ली में पानी के नए कनेक्शन के लिए अब 2100 रुपये देने होंगे। पहले नए कनेक्शन के लिए 1050 रुपये देने पड़ते थे।
दिल्ली में पुराने कनेक्शन को कटवाने के लिए भी अब ढाई गुना दाम ज्यादा देना पड़ेगा इसके लिए पहले 100 रुपये खर्च करने पड़ते थे अब 100 की जगह 250 रुपये खर्च करने पड़ेंगे। इस बढ़ोतरी पर दिल्ली जलबोर्ड के सीईओ का कहना है कि 1952 के बाद रेट नहीं बढ़ाए गए हैं इसीलिए हमने रिवाइज किया है। जो वास्तविक कीमत है हम वही ले रहे हैं।
वहीं गरीब-गुरबों और अकलियत की राजनीति करने वाले दिल्ली जलबोर्ड के वाइस चेयरमैन मतीन अहमद की भी कुछ ऐसी ही दलील है। मतीन के मुताबिक महंगाई बढ़ी है तो सरकार के लिए भी बढ़ी है इसलिए ये फैसला लिया गया है। बीते कुछ दिनों से दिल्ली के लोगों को बिजली के अनाप-शनाप बिल मिल रहे हैं। इसे लेकर भी सरकार के पास कोई जवाब नहीं।
पानी के बिल से संबंधित बढ़ती शिकायतों के मद्देनजर सरकार ने बिल से जुड़े मामलों को ऑनलाइन करने का फैसला किया है। इसके लिए सरकार ने प्राइवेट कंपनी टीसीएस को यह काम सौंपा है। हर परेशानी का समाधान निजीकरण में ढूंढने वाली सरकार को इसी में एक और रास्ता दिख रहा है। साफ है कि सरकार ने जनता को फिर एक झुनझुना पकड़ा दिया है।
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