नई दिल्ली। इक्कीसवीं सदी का भारत नेहरू के समय का भारत नहीं है, यह आत्मविश्वास से भरा, आशावादी और आगे बढ़ता हुआ भारत है। यह कहना है भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कद्दावर नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह का, लेकिन साथ ही वह यह सवाल भी उठाते हैं कि 'क्या भारत सुसभ्य राष्ट्र है?'
इस सवाल का उन्होंने उसी शैली में जवाब दिया, "यह सुसभ्य राष्ट्र नहीं है।"
जसवंत सिंह ने एक साक्षात्कार के दौरान कहा, "उदाहरण के लिए, एक सवाल के जवाब में नेहरू की उक्ति थी कि वह सभ्य साधनों के माध्यम से अत्यंत सुसभ्य भारत चाहते थे। अब सवाल है कि क्या हम अत्यंत सुसभ्य भारत हैं? नेहरू के भारत का एक और पहलू है कि जिन्होंने उनके राजनीतिक विचारों को मानने की आत्मघोषणा की थी, क्या वे अब भी संसद का उतना ही सम्मान करते हैं, जितना पहले करते थे?"
उन्होंने कहा, "हमारे प्रतिनिधियों, सरकार में भागीदार लोगों के कामकाज के तरीकों पर गौर करें, बहुत परेशान करने की एक प्रवृत्ति चल पड़ी है। ऐसा प्रतिपादन अनुत्पादक है, अवास्तविक भी। ऐसा किसी प्रकार का विकल्प बदनाम करने वाला है, किसी भी विपरीत दृष्टिकोण या विचार को समझने के बजाय वास्तव में विपक्ष की पूरी अवधारणा का विरोध किया जाता है।"
सत्ताधारी पार्टी द्वारा हाल में जारी एक विज्ञापन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार के खर्च पर कांग्रेस के बारे में पूरे पृष्ठ का विज्ञापन प्रकाशित करवाने का क्या औचित्य है, इस विज्ञापन का खर्च हम क्यों चुकाएं जिसके अध्यक्ष स्वर्गीय मोतीलाल नेहरू जो 150 वर्ष पहले जीवित थे, के बारे में है। (विज्ञापन मोतीलाल नेहरू की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में प्रकाशित हुआ था)
जसवंत ने कहा, "हमें सार्वजनिक जीवन में कुछ संयम बरतने की जरूरत है।"दार्जिलिंग से सांसद 74 वर्षीय जसवंत एक समय अपनी किताब 'जिन्ना: इंडिया पार्टीशन इंडिपेंडेंस' के कारण विवाद में फंस गए थे और उन्हें भाजपा से निष्कासित कर दिया गया था। पिछले हफ्ते उनकी नई किताब आई है 'द ऑडैसिटी ऑफ ओपिनियन : रिफ्लेक्शंस, जर्नी एंड म्यूजिंग्स'। यह दो दशकों के अंदर विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित उनके लेखों का संकलन है। इसमें देश के सामाजिक-राजनीतिक जीवन के पहलुओं और उन्होंने जिन मंत्रालयों को संभाला, उन पर रोशनी डालती है।
जसवंत सिंह ने अपनी इस किताब में कहा है कि कुछ चीजें नेहरू युग से चली आ रही हैं। वह कहते हैं, "नेहरूवाद का एक फीका प्रतिबिम्ब हमें आज भी देखने को मिल रहा है, लेकिन यह न तो यहां है और न वहां, क्योंकि जब वह जीवित थे, उस समय भी यह परिभाषित करना कठिन था कि यह नेहरूवाद क्या है।"
उल्लेखनीय है कि भाजपा नेता जसवंत 1998 से 2004 के बीच राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सरकार के दोनों शासनकाल में रक्षा एवं विदेश मंत्रालय संभाल चुके हैं।
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