नई दिल्ली। डायरेक्टर गौरी शिंदे की पहली फिल्म इंग्लिश-विंग्लिश से 15 साल बाद पर्दे पर वापसी कर रहीं श्रीदेवी इस फिल्म के शुरुआती पांच मिनट में ही शशि के किरदार में आपके दिल में जगह बना लेती हैं। वो एक महाराष्ट्रीयन गृहिणी हैं और अंग्रेजी न बोल पाने की वजह से अपने पति और बच्चों के असंवेदनशील जोक भी हंसते-हंसते अपने ऊपर ले लेती हैं। वो एक अच्छी पत्नी और मां हैं और छोटा सा कैटरिंग बिजनेस चलाती हैं।
शिंदे ने कहा है कि फिल्म की कहानी उनकी मां की जिंदगी के प्रभावित है। फिल्म में कुछ ऐसे दिल को छू लेने वाले सीन हैं जिनसे खुद को जोड़ना मुश्किल नहीं होगा। शशि की स्कूल जाने वाली बेटी शर्मसार हो जाती है जब पेरेंट्स टीचर मीटिंग में उसकी मां एक टीचर से पूछती है कि क्या वो हिंदी में बात कर सकते हैं क्योंकि उसकी इंग्लिश कमजोर है। जब एक और पेरेंट उसकी मां से बात करने आती है,तो वो घबरा कर उसे वहां से ले जाती है। चीजें तब बदलती हैं जब शशि अपनी भतीजी की शादी की तैयारियों के लिए हिचकिचाते हुए अकेले न्यूयॉर्क पहुंचती है। तब मैनहट्टन कैफे में कॉफी या सैंडविच ऑर्डर करने में भी उसे तकलीफ महसूस होती है तो वो घबराते हुए इंग्लिश स्पीकिंग का कोर्स करती है। ये कहानी है शशि की कि कैसे वो अपना आत्मसम्मान वापस पाती है। शिंदे इसके सेंटर रोल में श्रीदेवी को एकदम सही कास्ट करती हैं। श्रीदेवी चार्मिंग लगती हैं और इतनी शानदार परफॉर्मेंस देती हैं जो परफेक्शन से कम नहीं लगती। शशि की बड़ी बहन के किरदार में सुजाता कुमार अच्छी लगती हैं और शशि के बच्चों के किरदार में दोनों चाइल्ड एक्टर्स ने भी जीवंत अभिनय किया है। फिल्म में अमिताभ बच्चन का कैमियो भी है जो अपनी शानदार कॉमिक टाइमिंग से वो सीन चुरा लेते हैं जिसमें वो हैं। एक हल्की-फुल्की पर कुछ अहम बात पर जोर देती गौरी शिंदे की फिल्म साल की बेहतरीन फिल्मों में से है। मैं इंग्लिश विंग्लिश को पांच में से साढ़े तीन स्टार देता हूं। ये दिल को छूने वाली फिल्म है जो आपको बड़ी सी मुस्कान के साथ छोड़ जाएगी।

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