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फ्लैचर ने टीम को दिया क्या, BCCI मांगे जवाब: वेंगसरकर

| Oct 11, 2012 at 07:59pm

नई दिल्ली।टीम इंडिया के पूर्व कप्तान दिलिप वेंगसकर ने हाल के महीनों में हार के लिए कोच डंकन फ्लैचर को जिम्मेदार ठहराया है। वेंगसरकर के मुताबिक बीसीसीआई को अब फ्लैचर से पिछले डेढ़ साल का हिसाब लेने का सही वक्त आ गया है। डंकन फ्लैचर को टीम इंडिया का कोच बने करीब 16 महीने हो गये हैं। बीसीसीआई ने उन्हें पिछले साल वेस्टइंडीज दौरे से पहले 24 महीनों का कांट्रैक्ट दिया था। टीम इंडिया के खराब खेल का ठीकरा अब तक कप्तान एम एस धोनी, सिनियर खिलाड़ियों और गेंदबाजों पर फोड़ा गया है लेकिन हैरानी की बात है कि फ्लैचर के बारे में कोई बात नहीं करता है। अहम सवाल ये उठता है कि अपने कांट्रैक्ट का दो तिहाई समय बिताने के बाद फ्लैचर ने भारतीय क्रिकेट को कुछ भी नहीं दिया है।

वेस्टइंडी़ज में पहली सीरज जीतने के बाद फ्लैचन को इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया दौरे पर शर्मनाक हार का समाना करना पड़ा। वन-डे क्रिकेट में भी टीम इंडिया लगातार जूझती नजर आयी। ऑस्ट्रेलिया में ट्राईसीरीज के फाइनल में नहीं पहुंचने की नाकामी के साथ टीम एशिया कप के फाइनल में भी नहीं पहुंच पायी। बाकी

कसर श्रीलंका में टी-20 वर्ल्ड कप की नाकामी ने पूरी कर दी है।

फ्लैचर के दौर में रोहित शर्मा जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी वन-डे टीम में जहग नहीं पक्की कर पायें और ना ही सुरेश रैना का टेस्ट मैचों में खेल बेहतर हुआ। अंजिक्या रहाणे और मनोज तिवारी जैसे युवा खिलाड़ी भी मार्गदर्शन के लिए तरसते रहे। सचिन तेंदुलकर आज राइट और कर्स्टन की तारीफ करते नहीं अघाते हैं लेकिन फ्लैचर के आने से तेंदुलकर को कितना फायदा हुआ? तेंदुलकर जब सौवें शतक के भंवर में फंसे थे तो कोच ने उनकी कितनी मदद की। न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज में तेंदुलकर लगातार एक तरीके से आउट हो रहे थे, कोच ने इस कमी को दूर करने के लिए क्या किया? गौतम गंभीर और वीरेंद्र सहवाग अगर तीनों फॉर्मेट में 2 साल से जूझ रहे हैं तो आखिर कोच की भूमिका क्या है?

फ्लैचर के दौर में ना तो जहीर खान और हरभजन सिंह जैसे अनुभवी खिलाड़ियों को कोई खास फायदा हुआ और ना ही विनय कुमार और वरुण ऐरॉन जैसे युवा गेंदबाजों को। फ्लैचर की पसंद शुरु से ही 150 किलीमिटर प्रतिघंटा रफ्तार वाले गेंदबाज रहे हैं लेकिन भारत में ऐसी प्रतिभा की कमी ने कोच को बाकि गेंदबाजों के प्रति अंधा बना दिया?

पूरे ऑस्ट्रेलिया दौरे पर सार्वजनिक तौर पर कप्तान धोनी के साथ वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर का विवाद खुलकर सामने आता है और फ्लैचर धृतराष्ट्र के तौर पर बैठे रहे। आलम ये रहा कि बीसीसआई को इस मामले को ठंडा करने के लिए भारत से फरमान जारी करना पड़ा। वीवीएस लक्ष्मण जैसा अनुभवी खिलाड़ी अचानक संन्यास की घोषणा कर देता है और कोई भी कोच से सवाल नहीं पूछता है आखिर ऐसा क्या हो गया?

चेन्नई में अपनी पहली प्रेस कांफ्रेंस के दौरान ही फ्लैचर को समझ में आ गया था कि उन्हें भारतीय क्रिकेट में कितना और किसके सामने मुंह खोलना है। वैसे भी हमेशा मीडिया से दूर रहने वाले फ्लैचर को पता था कि जॉन राइट और गैरी कर्स्टन की कामाबी की वजह अगर पर्दे के पीछे रहकर रणनीतियों को अंजाम देना था तो ग्रेग चैपल का हर मुद्दे पर जुबान खोलना उन्हें आखिरकार ले डूबा। लेकिन, फ्लैचर राइट और कर्स्टन की तरह टीम इंडिया के खराब दिनों में जिम्मेदारी लेने के लिए कभी भी समाने नहीं आए।

ऑस्ट्रेलिया दौर पर 3 महीनों में फ्लैचर सिर्फ एक बार प्रेस के समाने आये। टी-20 वर्ल्ड कप में भी फ्लैचर एक बार भी कप्तान या टीम के बचाव में सामने नहीं आये।

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