नई दिल्ली। टेलीकॉम घोटाले को लेकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर पूर्व कैबिनेट सेक्रेटरी के एम चंद्रशेखर द्वारा सीधे उंगली उठाने के बाद बीजेपी और लेफ्ट पार्टियों ने सरकार पर हमला तेज कर दिया है। पूर्व कैबिनेट सचिव के.एम चंद्रशेखर ने गुरुवार को जेपीसी के सामने पेश होकर अपना बयान दर्ज कराया था। जिसमें उन्होंने उंगली सीधे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की नीयत पर उठाई थी।
बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद के मुताबिक पूर्व कैबिनेट सेक्रेटरी की बात से फिर साबित हो जाता है कि कोई भी घोटाला बिना मनमोहन सिंह की सहमती के नहीं हो सकता। मनमोहन सिंह और चिदंबरम को जवाब देना चाहिए। कांग्रेस हमेशा से अपने घोटालेबाजों को बचाती रहती है, चाहे वो वीरभद्र हो या फिर शीला दीक्षित या फिर केंद्रीय नेता। देश इसे देख रहा है। सोनिया गांधी जवाब दें।

दरअसल के. एम. चंद्रशेखर ने जेपीसी को बताया था कि उन्होंने 4 दिसंबर 2007 को प्रधानमंत्री को एक नोट भेजा था। इसमें उन्होंने लिखा था कि स्पेक्ट्रम की कीमत 35 हजार करोड़ रुपये तय की जाए। लेकिन सरकार ने उनकी बात नहीं मानी और स्पेक्ट्रम सिर्फ 1658 करोड़ रुपये में बेच दिया। चंद्रशेखर ने ये भी साफ किया कि 25 मार्च 2011 के वित्तमंत्रालय के विवादित नोट से उनका या उनके सचिवालय का कोई लेना-देना नहीं था। इस नोट में लिखा गया था कि अगर तत्कालीन वित्तमंत्री पी.चिदंबरम चाहते तो टेलीकॉम घोटाले में हुआ नुकसान रोका जा सकता था।
यूपीए दो को घिरता देख लेफ्ट पार्टियां भी हमलावर हो गई हैं। सीपीआई नेता गुरुदास दास गुप्ता ने अपने बयान में कहा कि ये बहुत महत्वपूर्ण मामला है कि प्रधानमंत्री को इसकी जानकारी थी। उनको सिक्रेटरी ने जानकारी दी थी। उसके बाद भी प्रधानमंत्री ने कोई कदम नहीं उठाया। साफ है कि वो अपना काम नहीं कर पाए, ये उनकी कमजोरी है।
भ्रष्टाचार के मामलों में घिरी कांग्रेस के लिए ये परेशानी का एक और मोर्चा है। वो पूर्व कैबिनेट सचिव की बात को निजी राय बता कर मामले को ठंडा करने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित के मुताबिक हर आदमी का अपना मत होता है। नीतिया बदली हैं और बदलती रहती हैं। चंद्रशेखर का अपना मत हो सकता है।
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