शिमला। हिमाचल प्रदेश की चुनावी जंग में कांग्रेस का चेहरा कहे जाने वाले पूर्व इस्पात मंत्री वीरभद्र सिंह, भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में घिर गए हैं। विपक्ष पहले ही उन पर इस्पात कंपनियों से रिश्वत लेने के आरोप लगा चुका है। वीरभद्र पर आरोप लग रहे हैं कि साल 2009 से 2012 के बीच खेती से होने वाली उनकी कमाई में बेतहाशा इजाफा हुआ।
आईबीएन7 के पास मौजूद दस्तावेजों के मुताबिक वीरभद्र सिंह ने 2009-10 में जो आयकर रिटर्न दाखिल किया, उसमें खेती से हुई कमाई 7 लाख 34 हजार बताई गई। 2010-11 में उन्होंने खेती से हुई कमाई 15 लाख रुपए और 2011-12 में 25 लाख बताई। फिर अचानक 2 मार्च 2012 को उन्होंने इन तीनों सालों के लिए दोबारा आयकर रिटर्न दाखिल किया। इसके मुताबिक खेती से हुई कमाई साल 2009-10 में 7 लाख की जगह दो करोड़ 21 लाख से ज्यादा हो गई। 2010-11 की कमाई 15 लाख से बढ़कर दो करोड़ अस्सी लाख से ज्यादा हो गई। इसी तरह साल 2011-12 की कमाई 25 लाख से बढ़कर एक करोड़ 55 लाख रुपए हो गई।

दरअसल वीरभद्र सिंह ने आनंद चौहान नाम के एक शख्स के साथ 15 जून 2008 को एक सहमति पत्र तैयार किया था। इसके मुताबिक आनंद चौहान को वीरभद्र सिंह के सेव के बागों को संभालना था और उससे होने वाली कमाई एलआईसी और सरकारी कंपनियों में निवेश करना था। 24 अप्रैल 2008 से 31 मार्च 2010 के बीच आनंद चौहान ने करीब पांच करोड़ रुपए अपने बैंक खातों में जमा कराए और इसी दौरान उसने वीरभद्र सिंह और उनके परिवार के नाम पर करीब पांच करोड़ रुपए एलआईसी में निवेश किए। यहां एक और सवाल खड़ा होता है कि इसी तरह का एक और सहमति पत्र वीरभद्र सिंह ने 17 जून 2008 को बिशंभर दास नाम के एक शख्स के साथ भी तैयार किया था। सवाल ये उठता है कि एक ही काम के लिए दो सहमति पत्र कैसे और क्यों तैयार किए गए।
वीरभद्र सिंह पर पहले भी आरोप लगाने वाले अरविंद केजरीवाल की टीम का कहना है कि ये सीधा सीधा भ्रष्टाचार का मामला है। उधर, विपक्ष इसे सीधे-सीधे रिश्वतखोरी का मामला बता रहा है। उसका आरोप है कि इस्पात इंडस्ट्रीज नाम की एक कंपनी से मिली रिश्वत से वीरभद्र सिंह ने ये कमाई की है। दरअसल एक दिसंबर 2010 को आयकर विभाग ने इस्पात इंडस्ट्रीज पर छापा मारा था। उस दौरान मिले दस्तावेज में साफ लिखा था कि साल 2009 और 2010 के दौरान कंपनी ने वीबीएस नाम के व्यक्ति को करीब ढाई करोड़ रुपए नकद भुगतान किया था।
विपक्ष के मुताबिक वीबीएस कोई और नहीं, बल्कि वीरभद्र सिंह हैं, जिन्हें रिश्वत के रूप में ये रकम दी गई। इसी को उन्होंने अपने रिवाइज्ड आयकर रिटर्न में खेती की कमाई दिखाया है। हालांकि वीरभद्र सिंह का कहना है कि वो किसी भी जांच के लिए तैयार हैं और उन पर लगाए जा रहे आरोप राजनीति से प्रेरित हैं। विधानसभा चुनाव में मेरी बदनामी की कोशिश में लगे विपक्ष को मैं बताना चाहता हूं कि प्रदेश की जनता ही मेरा भविष्य तय करेगी। जनता को सच पता है और आयकर विभाग भी जो जांच करना चाहता है, कर सकता है। चुनावों के बाद मैं उन सभी लोगों के खिलाफ उपयुक्त कार्यवाही करूंगा, जो इस दुष्प्रचार में शामिल हैं।
पूर्व केंद्रीय मंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ लगे आरोपों को शर्मनाक करार देते हुए बीजेपी ने पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने इसी बहाने सोनिया गांधी पर निशाना साधते हुए कहा है कि अब उन्हें हिमाचल आकर भ्रष्टाचार पर भाषण नहीं देना चाहिए। वहीं, कांग्रेस ने वीरभद्र सिंह का बचाव करते हुए आरोपों को राजनीतिक साजिश करार दिया है।
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