चंडीगढ़। कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा की लैंड डील मामले में की गई जांच में हरियाणा के डिप्टी कमिश्नर को किसी तरह की अनियमितता नहीं मिली है। ये दावा एनसीआर एरिया के गुड़गांव, फरीदाबाद, पलवल और मेवात जिलों के डीसी की ओर से जांच रिपोर्ट में दिया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन जिलों में खरीदी गई जमीनों में सभी में वाड्रा ने स्टाम्प ड्यूटी की पूरी पेमेंट की है। कुल मिलाकर चारों जिलों के डीसी की रिपोर्ट वाड्रा को क्लीन चिट दे रही हैं।
सूत्रों के मुताबिक डीसी ने अपनी रिपोर्ट में वाड्रा की कंपनियों द्वारा तयशुदा से ज्यादा स्टाम्प ड्यूटी के भुगतान की बात तो कही है, लेकिन वाड्रा से अधिक स्टाम्प ड्यूटी का भुगतान क्यों किया। इसकी वजह चारों जिलों के डीसी की रिपोर्ट में नहीं बताई गई है।

जांच के बाद चार डिप्टी कमिश्नर के पैनल में वाड्रा को पूरी तरह से क्लीन चिट दी है। बीते 12 अक्टूबर को आईएएस अफसर अशोक खेमका के आदेश के बाद चार डिप्टी कमिश्नरों को मामले की जांच सौंपी गई थी।
इंडिया अंगेस्ट करप्शन एक्टिविस्ट अरविंद केजरीवाल ने इस नतीजे को अपेक्षित बताते हुए जांच पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। केजरीवाल ने ट्वीट करते हुए कहा है कि हरियाणा के अफसरों ने वाड्रा को क्लीन चिट दी है, वह अपेक्षित था। देश को हैरानी तब होती जब नतीजा इसके उलट आता। केजरीवाल ने अपनी पुरानी बात को दोहराते हुए कहा कि कांग्रेस और बीजेपी एक ही नाव पर सवार हैं।
अब कांग्रेस गडकरी के और बीजेपी वाड्रा के बचाव में उतर आएगी। कांग्रेस-बीजेपी भाई भाई जैसे जुमले का प्रयोग करते हुए ट्वीट किया कि आईटी एक्ट के अंदर आप रेड (सेक्शन 132) या सर्वे (सेक्शन 133ए) या जांच (सेक्शन 143) कर सकते हैं, आखिर सरकार कर क्या रही है?
वहीं, वाड्रा-डीएलएफ डील को रद्द करने वाले आईएएस अफसर अशोक खेमका भी रिपोर्ट से इतर अपनी बात करते दिखाई दिए। खेमका ने कहा कि लैंड डील के म्यूटेशन को रद्द किए जाने वाले उनके फैसले पर तुरंत अमल होना चाहिए। यदि इस मामले में कोई पक्ष असंतुष्ट हो तो वह कोर्ट का रुख कर सकता है।
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