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कैबिनेट फेरबदल: आंध्र प्रदेश से सबसे ज्यादा 6 मंत्री बने

| Oct 28, 2012 at 06:22pm

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री मनमोहन मंत्रिमंडल के ताजा फेरबदल में सबसे ज्यादा तरजीह आंध्र प्रदेश को मिली है। अकेले आंध्र प्रदेश से मंत्रिमंडल में कुल 6 मंत्री हैं। दूसरे नंबर पर बंगाल है जहां से तीन मंत्री शामिल किए गए हैं। हालांकि इस फेरबदल को लेकर पार्टी के भीतर असंतोष भी उभर आया है। पार्टी महासचिव दिग्विजय सिंह ने मध्य प्रदेश को कम तवज्जो मिलने पर नाराजगी का इजहार किया है।

सरकार का चेहरा बदलने की कवायद में सबसे ज्यादा मंत्रालय आंध्र की झोली में आए हैं। वो भी तब जब जयपाल रेड्डी, जयराम रमेश और एनटीआर की बेटी डी. पुरंदेश्वरी जैसे चेहरे पहले ही मंत्रिमंडल की शोभा बढ़ा रहे हैं। जानकारों की मानें तो इसके पीछे दो ठोस वजहे हैं। पहली वजह राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री राजशेखर रेड्डी के बेटे जगन और दूसरी वजह अलग तेलंगाना राज्य की जोर पकड़ती मांग।

कडप्पा से सांसद जगन रेड्डी ने अलग पार्टी बना कर और पूरे राज्य में यात्राएं निकाल कर अपनी ताकत का अहसास करा दिया है। कांग्रेस ने सीबीआई के सहारे जगन की कमर तोड़ने की पूरी कोशिश की, लेकिन ये कोशिश उल्टी पड़ी। अब नजर राज्य में जातीय समीकरण को तोड़ने पर है। लिहाजा एक तरफ कपु समुदाय के पल्लम राजू को प्रमोशन देकर मानव संसाधन मंत्रालय दिया गया तो दूसरी ओर कपु समुदाय के ही सुपरस्टार चिरंजीवी को स्वतंत्र प्रभार का राज्य मंत्री बनाया गया। यही नहीं रेड्डी समुदाय़ के मजबूत गढ़ में सेंध लगाने का काम पूर्व मुख्यमंत्री विजय भाष्कर रेड्डी के बेटे सूर्यप्रकाश रेड्डी करेंगे।

जहां तक अलग तेलंगाना का सवाल है तो अब राज्य के कांग्रेसी भी इसके पक्ष में ही दिख रहे हैं। जाहिर है इन हालात में आंध्र को तरजीह देना मजबूरी थी। ताजा फेरबदल में दूसरा तरजीही सूबा पश्चिम बंगाल है, जहां तृणमूल की सरकार से विदाई के बाद कांग्रेस के सांसदों की चांदी हो गई है। हालांकि तृणमूल के 6 मंत्रियों की विदाई के बाद बंगाल से तीन ही नए मंत्री आए हैं। इन तीन राज्य मंत्रियों में से दो

दीपा दासमुंशी और अधीर रंजन चौधरी ममता बनर्जी के धुर विरोधी हैं। ये वो मंत्री हैं जो गठबंधन के दौरान भी ममता और तृणमूल पर हमले का कोई मौका नहीं चूकते थे। तीसरा चेहरा है अल्पसंख्यक ए एच खान चौधरी का। गनी खान चौधरी के राजनीतिक परिवार से आने वाले ए एच खान चौधरी राज्य के अल्पसंख्यक तबके को रिझाने के लिए लाए गए हैं। फिलहाल अल्पसंख्यक तबका सिंगूर और नंदीग्राम के बाद से ही ममता के साथ है। हालांकि तृणमूल ने इस फेरबदल को राज्य के लिए किसी काम का नहीं माना।

हालांकि ताजा बंटवारे में मध्यप्रदेश के हाथ कुछ नया नहीं आया। इस पर पार्टी महासचिव दिग्विजय सिंह ने नाराजगी का इजहार भी कर दिया। उन्होने साफ कहा कि मध्यप्रेदश को इससे निराशा हुई है। बहरहाल गुजरात चुनाव का ध्यान रखते हुए दिनशा पटेल को कैबिनेट मंत्री और भरत सिंह सोलंकी को पेयजल मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार दिया गया है। सवाल ये है कि मंत्रिमंडल में राज्यों को ऐसी तरजीह आने वाले दिनों में कितना रंग दिखाएगी।

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