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रक्षा राज्यमंत्री का चार्ज लेने गए कटारिया बैरंग लौटाए गए!

| Oct 30, 2012 at 05:45pm | Updated Oct 30, 2012 at 06:04pm

नई दिल्ली। मनमोहन कैबिनेट में फेरबदल के दौरान हुई एक गड़बड़ी ने सरकार की किरकिरी करा दी है। बतौर राज्यमंत्री कार्यभार संभालने रक्षा मंत्रालय पहुंचे लालचंद कटारिया को कुर्सी पर बैठने से पहले ही वापस लौटना पड़ा। ऐन वक्त पर रक्षा मंत्री ए के एंटनी को एहसास हुआ कि दोनों राज्य मंत्री राजस्थान से हैं। कांग्रेस के लिए इस गड़बड़ी पर जवाब देना मुश्किल हो रहा है, जबकि बीजेपी की नजर में ये यूपीए सरकार के बिगड़े हाल का एक और सबूत है।

जयपुर ग्रामीण क्षेत्र से सांसद कटारिया को जब मनमोहन मंत्रिमंडल में रक्षा राज्य मंत्री बनने की खबर मिली तो फूले नहीं समाए। लेकिन किस्मत कहिये या कलम की गड़बड़ी। सामने से भरी थाली खींच ली गई। दरअसल, कटारिया पूरे जोश के साथ सोमवार को अपना पद संभालने रक्षा मंत्रालय पहुंचे थे। लेकिन बेचारे कुर्सी पर बैठते, इससे पहले ही संदेश आ गया कि वे कार्यभार न संभालें और तुरंत 10 जनपथ जाकर सोनिया गांधी से मिलें। अचकचाए कटारिया लौट गए। उन्हें बताया गया कि वे इंतजार करें। उन्हें कोई दूसरा मंत्रालय दिया जाएगा। इसके बाद से ही वो मीडिया से बात नहीं कर रहे हैं। उधर, कांग्रेस के लिए भी इस हास्यास्पद स्थिति पर जवाब देना मुश्किल हो रहा है।

दरअसल कटारिया के अरमानों पर रक्षा मंत्री ए के एंटनी की सोच ने ग्रहण लगा दिया। एंटनी ने प्रधानमंत्री को बताया कि उनके दोनों राज्य मंत्री एक ही राज्य यानी राजस्थान के हैं। रक्षा जैसे संवेदनशील मंत्रालय में ऐसा करना ठीक नहीं। चूंकि दूसरे राज्य मंत्री यानी भंवर जितेंद्र सिंह अपना कार्यभार संभाल चुके थे, ऐसे में कटारिया को खाली हाथ लौटना पड़ा। इससे पहले रक्षा राज्य मंत्रालय को लेकर एक और भ्रम फैल चुका था।

पहली लिस्ट में रक्षा राज्य मंत्री के तौर पर जितिन प्रसाद का नाम जारी हुआ था लेकिन 28 तारीख को ही रात नौ बजे राष्ट्रपति भवन से संदेश आया कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने ये विभाग भंवर जितेंद्र सिंह को दिया है। सूत्रों के मुताबिक पीएमओ को बाद में अहसास हुआ कि गलती से जीतेंद्र की जगह जितिन का नाम चला गया है। जाहिर है, इस गड़बड़झाले ने बीजेपी को फेरबदल पर मजा लेने का मौका दे दिया है।

बहरहाल, लालचंद कटारिया फिलहाल बिना मंत्रालय के मंत्री हैं। चर्चा है कि उन्हें पेट्रोलियम मंत्रालय में राज्य मंत्री बनाया जा सकता है लेकिन इस घटना ने एक बार फिर इस बात को हवा दे दी है कि राज्य मंत्री का पद सिर्फ सजावटी है। उसे गंभीरता से नहीं लिया जाता।

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