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केजरीवाल का चैलेंज, उनके जैसी हिम्मत दिखाए बीजेपी!

| Oct 30, 2012 at 06:54pm

नई दिल्ली। बीजेपी और अरविंद केजरीवाल में ठन गई है। केजरीवाल ने बीजेपी को चुनौती दी है कि उनके एनजीओ को मिलने वाले चंदे की पूरी जानकारी वेबसाइट पर उपलब्ध है। बीजेपी भी इसी तरह उन लोगों के नाम सार्वजनिक करने की हिम्मत दिखाए जिनसे वो चंदा लेती है। अरविंद ने ये जवाब बीजेपी के मुखपत्र कमल संदेश में छपे संपादकीय पर दिया है। इसमें अरविंद को अन्ना का विश्वासघाती बताते हुए उनके एनजीओ को मिलने वाले चंदे पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

कांग्रेस शुरू से आरोप लगाती रही है कि अरविंद केजरीवाल और उनके साथी बीजेपी की बी टीम है लेकिन जब से अरविंद ने बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी पर किसानों की जमीन हथियाने का आरोप लगाया है और बीजेपी-कांग्रेस को एक ही सिक्के के दो पहलू बताना शुरू किया है, बीजेपी ने भी उन पर हमला तेज कर दिया है। मंगलवार को अरविंद ने उनके एनजीओ की फंडिंग पर सवाल उठाने के लिए बीजेपी को खरी-खोटी सुनाईं।

अरविंद के मुताबिक उन्होंने अपने एनजीओ को मिले चंदे की एक-एक जानकारी वेबसाइट पर डाल दी है। अगर बीजेपी में हिम्मत है तो वो भी पार्टी को मिले चंदे और चंदा देने वालों की जानकारी सार्वजनिक करे। दरअसल, बीजेपी के मुखपत्र कमल संदेश के ताजा अंक के संपादकीय में अरविंद को अन्ना का विश्वासघाती करार देते हुए आरोप लगाया गया है कि अरविंद के आंदोलन के पीछे विदेशी पैसा है।

कमल संदेश के संपादकीय के मुताबिक केजरीवाल का खेल करेंसी का हो सकता है। अब जानना यह है कि यह करेंसी भारत की है या फिर भारत को कमजोर करने वाली शक्तियों की। 'सुपारी' किसने दी है यह पता तो डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार को लगाना ही चाहिए। केजरीवाल वैसे निकले जैसे सौ- सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली। अरे, जो अन्ना का नहीं वह देश का क्या होगा। विदेशी धन से देशी लोकतंत्र का गड्ढा खोदने में लगे केजरीवाल शायद ये भूल गए कि भारत के जन गण मन की आत्मा की लोकतंत्र के प्रति गहरी आस्था है। केजरीवाल हैं क्या। क्या उनके बारे में लोगों को नहीं मालूम कि वह है अन्ना आंदोलन का 'ब्लैक मेलर' या यूं कहें कि अन्ना के साथ विश्वासघात करने वाला। संगीन आरोपों और साजिशों के ढेर पर बैठकर विदेशी धन से स्वदेशी भावना की लड़ाई नहीं लड़ी जा सकती।

आमतौर पर कमल संदेश में ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं होता। लेकिन लगता है कि संघप्रिय गडकरी के बचाव में बीजेपी कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। अरविंद पर आक्रमण इसी रणनीति का हिस्सा है। दरअसल, बीजेपी को शिकायत है कि अरविंद केजरीवाल उसके हाथ से भ्रष्टाचार का मुद्दा छीनने की कोशिश कर रहे हैं। यही नहीं,वे भ्रष्टाचार को लेकर बीजेपी और कांग्रेस को एक ही खेमे में रख रहे हैं। यही हाल रहा तो चुनाव में कांग्रेस से नाराजगी का फायदा बीजेपी को मिलना मुश्किल होगा। दिल्ली में चुनाव लड़ने की घोषणा करके भी अरविंद ने बीजेपी से राजनीतिक दुश्मनी मोल ले ली है।

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