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गुजरात में बीजेपी को मिल सकते हैं पहले से ज्यादा वोट!

| Oct 30, 2012 at 07:09pm | Updated Oct 31, 2012 at 02:52pm

नई दिल्ली। मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की दिल्ली की दावेदारी गुजरात के रास्ते होकर आती है। ऐसे में गुजरात विधानसभा चुनाव देश की राजनीति की दशा और दिशा तय करने वाले साबित हो सकते हैं। सवाल ये है कि क्या गुजरात की जनता मोदी को फिर अपना आशीर्वाद देगी या फिर कांग्रेस और केशुभाई नरेंद्र मोदी के सपनों को चकनाचूर कर देंगे। IBN7 और द वीक के लिए CSDS का सर्वे कहता है कि गुजरात में नरेंद्र मोदी का जादू बरकरार है।

गुजरात चुनाव से पहले IBN7 और द वीक के लिए CSDS ने 60 विधानसभा के 240 मतदान केंद्रों पर 3658 मतदाताओं की रायशुमारी की। 13 से 20 अक्टूबर के बीच हुए सर्वे में हिंदू, मुस्लिम, अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को शामिल किया गया। जो नतीजे आए वो नरेंद्र मोदी की ऐतिहासिक जीत की तरफ इशारा कर रहे हैं। सर्वे के मुताबिक चुनाव में बीजेपी को 50 फीसदी वोट मिलने का अनुमान है।

पिछली दफा के मुकाबले बीजेपी को एक फीसदी वोटों का फायदा हो सकता है। केशुभाई पटेल की गुजरात परिवर्तन पार्टी को 3 फीसदी वोट मिलने की उम्मीद है लेकिन खास बात ये है कि केशुभाई मोदी से ज्यादा कांग्रेस के वोटों में सेंध लगाते नजर आ रहे हैं। 2 फीसदी वोटों के नुकसान के साथ कांग्रेस को 36 फीसदी वोट मिलने की संभावना है जबकि अन्य के आते में 11 फीसदी वोट जाने की उम्मीद है।

सर्वे में शामिल 52 फीसदी लोगों ने माना कि गुजरात में बीजेपी को एक और मौका मिलना चाहिए जबकि 30 फीसदी ने इसके विपरीत राय दी। 49 फीसदी लोगों की राय है कि नरेंद्र मोदी को ही फिर मुख्यमंत्री बनना चाहिए। मुख्यमंत्री पद की रेस में बाकी नाम काफी पीछे नजर आए। सिर्फ 8 फीसदी केशुभाई पटेल को, 6 फीसदी शंकर सिंह बाघेला को और 4 प्रतिशत शक्ति सिंह गोहिल को मुख्यमंत्री देखना चाहते हैं।

खास बात ये है कि मुसलमानों की नजर में मोदी की छवि सुधरी है। 2009 में हुए सर्वे में जहां 14 फीसदी लोगों ने मोदी को पसंद किया था, वहीं ताजा सर्वे में इनकी संख्या बढ़कर 26 प्रतिशत पर पहुंच गई लेकिन जब मुस्लिमों मतदाताओं से पूछा गया कि क्या मोदी को 2002 के दंगों के लिए माफी मांगनी चाहिए, तो 55 फीसदी ने कहा-हां। 44 फीसदी हिंदू वोटर भी मानते हैं कि मोदी को माफी मांगनी चाहिए। 51 प्रतिशत मुस्लिम और 42 फीसदी हिंदू मोदी की सदभावना यात्रा को राजनीतिक स्टंट मानते हैं।

सड़क, बिजली, पानी, स्कूल और सिंचाई जैसे विकास से जुड़े मुद्दों पर सर्वे में शामिल लोगों ने मोदी को क्रेडिट दिया लेकिन 38 फीसदी लोगों के मुताबिक गुजरात में रोजगार के मौके कम हुए हैं और 35 फीसदी का कहना है कि राज्य में किसानों की हालत बीते सालों में बदतर हुई है। 19 फीसदी लोगों ने किसानों की समस्या को बड़ा चुनावी मुद्दा बताया हालांकि सर्वे में 42 प्रतिशत लोगों ने कहा कि महंगाई सबसे बड़ा मुद्दा है। बढ़ती कीमतों के मोर्चे पर 14 फीसदी लोगों ने मोदी को जिम्मेदार ठहराया। 27 प्रतिशत ने केंद्र सरकार पर उंगली उठाई तो 39 फीसदी ने कहा कि महंगाई के लिए केंद्र और राज्य सरकार दोनों जिम्मेदार हैं।

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