नई दिल्ली। तालिबान लड़ाके धीरे-धीरे पाकिस्तान के बड़े इलाके की ओर पर काबिज होते जा रहे है। जमीन पर कब्जा करने के साथ-साथ वो लोगों के दिलों दिमाग पर कब्जा कर रहे हैं। दरअसल पाकिस्तान के पूरे नार्थ वेस्ट फ्रंटियर प्रोविंस में तालिबान और पाकिस्तानी फौज आमने-सामने हैं।
ऐसे में वो भला तालिबान अपने कब्जे वाले इलाकों में पाकिस्तानी फौज को क्यों बर्दाश्त करने लगे। तालिबान द्वारा वजीरिस्तान के लोगों को आगाह किया जाता है कि फौज को यहां न तो किसी को अस्पताल खोलने और न ही स्कूल खोलने की इजाजत है। यही नहीं तालिबान का फरमान है कि जो भी शख्स फौज के इन अस्पतालों में जाएगा या इन स्कूलों में बच्चों को भेजेगा उसका सिर कलम कर दिया जाएगा।
जाहिर है तालिबान को न तो इलाके के लोगों की जान की कोई परवाह है और न ही उनके बच्चों के मुस्तकबिल की। लोगों के पास भी उनकी बात मानने के अलावा कोई चारा भी नहीं है क्योंकि तालिबान की बात को न मानना यानी मौत को गले लगाना।
दरअसल तालिबान के फरमान को जो जिसने भी नजरअंदाज किया उसे सरेआम कत्ल कर दिया जाता है। वो भी हजारों लोगों के बीच सबको दिखाकर। तालिबान के इस अंदाज से पाकिस्तान का एक बहुत बड़ा इलाका उनके खौफ में जीने को मजबूर है। पिछले कुछ दिनों में ही तालीबान करीब 20 लोगों को मौत के घाट उतार चुका है।
स्वात घाटी में शायद कोई ऐसा दिन हो जब लोगों को पेड़ से झूलती लाशें न मिलती हो। कभी कोई टीचर, तो कभी सरकारी अफसर और कभी कोई पुलिस ऑफिसर। यानी जो भी तालिबान के रास्ते में आने की हिमाकत करता है उसे मार दिया जाता है।
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