मंदसौर। शायद ही कोई ऐसा इंसान हो जिसने घरों में, ढाबों पर बच्चों को काम करते ना देखा हो। ये हमारी, आपकी, हम सबकी जिम्मेदारी है कि इसके खिलाफ आवाज उठाएं और अपने घरों में तो बच्चों को बिल्कुल काम पर ना रखें। सिटीजन जर्नलिस्ट राघवेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि कैसे मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में बच्चों की जिंदगी बर्बाद की जा रही है।
मंदसौर जिले की बड़ी आबादी निर्भर है उन पत्थरों पर जहां स्लेट पेंसिल का पत्थर निकलता है। उसके बाद कारखानों में इससे पेंसिल तैयार की जाती है और यही कारखाने सरकारी लापरवाही और माफिया की तानाशाही की वजह से मौत के सेंटर बन रहे हैं। इन कारखानों में कुछ अर्से काम करने के बाद कारीगर सिलीकोसिस नाम की बीमारी का शिकार हो जाते हैं।

पत्थर की पेंसिल बनाते वक्त जो धूल उड़ती है वो कारीगरों की सांस के साथ फेफड़ों तक पहुंच जाती है और गरीबी से जूझ रहे कारीगरों की किस्मत में आती है दर्दनाक मौत। आजीविका के लिए परिवार के सभी लोग इस काम में लग जाते हैं और बच्चों को भी पैकिंग के काम में लगाया जाता है।
इन्हें किन हालात में काम करना होता है इसका जायजा लेने के जब सिटीजन जर्नलिस्ट राघवेंद्र सिंह तोमर मौके पर पहुंचे तो वहां पर कई बच्चे काम करते दिखे। राघवेंद्र का कहना है कि वो अपना संघर्ष तब तक जारी रखेंगे जब तक कि बाल मजदूरी पूरी तरह खत्म नहीं हो जाती।
(IBNkhabar के मोबाइल वर्जन के लिए लॉगआन करें m.ibnkhabar.com पर!)
More on: mandsaur, madhya pradesh, child labour, domestic, house, hotel, cj








कमेंट्स
0