स्कूल में सफाई के लिए पैरों से लाचार टीचर की मुहिम

| Feb 03, 2009 at 02:01pm

नई दिल्ली। सिटीजन जर्नलिस्ट संजीव शर्मा दिल्ली के सुल्तानपुरी के सी- स्कूल में बच्चों को पढ़ाते हैं। इनका संघर्ष अपने स्कूल में साफ सफाई की व्यवस्था को सही करवाने के लिए है। संजीव के स्कूल में बच्चों की सेहत और जिंदगी से खिलवाड़ किया गया और जब उन्होंने इसके खिलाफ आवाज उठाई तो शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले को टाल दिया। यही नहीं अब संजीव के खिलाफ षड्यंत्र भी शुरू हो गया है।

करीब दो महीने पहले नवंबर में एक दिन संजीव ने स्कूल में जबर्दस्त बदबू महसूस की। पता चला कि स्कूल की एक क्लास के पास कुछ सुअर मर गए हैं। उन्होंने फौरन इस बारे में प्रिंसिपल को सूचना दी। प्रिंसिपल ने कहा कि इस गंदगी से बच्चे बीमार होते हैं तो हो जाएं आप क्यों परेशान होते हैं ये बच्चे आपके तो नहीं है।

प्रिंसिपल का रवैया देखकर संजीव ने स्कूल इंस्पेक्टर को फोन किया। स्कूल इंस्पेक्टर ने भी टका सा जवाब दिया कि उनके पास वक्त नहीं है। संजीव ने मामला शिक्षा विभाग के बडे़ अधिकारियों तक पहुंचाने का फैसला किया।

संजीव ने स्कूल में सड़ते जानवरों का वीडियो तैयार करवाया और साफ सफाई को लेकर और भी तहकीकात की। संजीव ये देखकर सन्न रह गए कि बच्चे जिस टंकी से पानी पीते हैं उसमें भी मरे हुए सुअर के टुकड़े पड़े हैं। परिंदों ने सुअर के टुकड़ों को टंकी में गिरा दिया था और बच्चे वही पानी पी रहे थे। संजीव वीडियो रिकार्डिंग और एक आवेदन लेकर डायरेक्टर के दफ्तर गए लेकिन उन्हें यहां भी निराशा ही हाथ लगी।

आखिरकार सुबह की शिफ्ट के प्रिंसिपल की मदद से ये सफाई हो पाई। लेकिन तब तक स्कूल के कई बच्चे बीमार हो गए थे। इसके बावजूद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। संजीव का सवाल है कि क्या बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वालों को यूं ही छोड़ना सही है।

उन्होंने इसके कारणों को जानने के लिए डायरेक्टर ऑफिस में सूचना के अधिकार के तहत आवेदन किया। डेढ़ महीने पूरे होने जा रहे हैं पर अभी भी नतीजे सामने नहीं आए हैं। मामले की जांच वही स्कूल इंस्पेक्टर कर रहे हैं जो खुद इस मामले में दोषी हैं।

इस मामले में आवाज उठाने पर संजीव को प्रताड़ित किया जाने लगा है। संजीव पैरों से लाचार हैं। स्कूल का मेन गेट बंद कर दिया गया है जिससे उनको छोटे गेट से बिना ट्राई साइकिल के घिसटते हुए क्लास तक पहुंचना पड़ता है।

इतना ही नहीं हाल ही में स्कूल के कई टीचर्स पर दबाव बनाकर प्रिंसिपल ने ये लिखवा लिया कि संजीव की मानसिक स्थिति ठीक नहीं हैं और उनका बच्चों के साथ रहना सही नहीं है।

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