गांव में स्कूल नहीं, सरकार को फिक्र नहीं

| Feb 03, 2009 at 02:04pm

भरूच। हर बच्चा पढ़े लिखे इसका इंतजाम करने का दावा सरकार करती है लेकिन सच्चाई ये है कि बजट होने के बावजूद नौकरशाही इस मुद्दे पर लापरवाही बरतती है। गुजरात के कुछ आदिवासी इलाकों की यही कहानी है। भरूच के एक गांव के लोग लगातार कोशिश कर रहे हैं कि बच्चों की शिक्षा का इंतज़ाम हो जाए लेकिन सरकार उनका साथ नहीं दे रही।

भरूच जिला प्रशासन के अनुसार जिले में 800 से ज्यादा प्राथमिक स्कूल हैं। लेकिन आजादी के 60 साल बाद भी भरूच के कई आदिवासी गांवों ऐसे हैं जहां लोगों की दरख्वास्त के बावजूद एक भी स्कूल नहीं बना। ऐसा ही एक गांव है देबार जहां 300 से अधिक परिवार रहते हैं। हर घर से लोग अपने बच्चों को स्कूल भेजना चाहते हैं। लेकिन गांव में स्कूल नहीं। बच्चों में पढ़ने की लगन को देखकर गांव के ही एक शख्स ने अपना निजी मकान दान में देकर स्कूल शुरू करवाया। लेकिन ये समस्या का हल नहीं।

गांव वाले परेशान हैं क्योंकि वो स्कूल की इमारत के लिए कई बार अधिकारियों से बात कर चुके हैं। उन्हें पत्र भी लिखे लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। बच्चे पढ़ना चाहते हैं, डॉक्टर इंजीनियर बनना चाहते हैं लेकिन इनके लिए स्कूल की इमारत नहीं।

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