नई दिल्ली। आखिरकार रिकी पॉन्टिंग ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास का ऐलान कर ही दिया। पॉन्टिंग ने अपने 17 साल के करियर में कई बेहतरीन पारियां खेलीं और ऑस्ट्रेलियाई टीम को बुलंदियों पर पहुंचाया। ये पॉन्टिंग ही थे जिन्होंने अपनी टीम को लगातार दो बार वर्ल्ड चैंपियन बनाया। हालांकि पिछले एक-डेढ़ साल से पॉन्टिंग सिर्फ टेस्ट मैच ही खेल रहे थे और लगातार अपने फॉर्म से जूझ रहे थे। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ चल रही घरेलू टेस्ट सीरीज में भी पॉन्टिंग का प्रदर्शन खराब चल रहा था। शायद यही वजह रही जिसने पॉन्टिंग को सोचने पर मजबूर कर दिया कि अब संन्यास लेने का सही वक्त आ गया है।
पॉन्टिंग के संन्यास के ऐलान ने सचिन पर कयासबाजी तेज कर दी है। क्या सचिन भी पॉन्टिंग की तर्ज पर ऐसा कुछ कदम उठाएंगे। पिछले साल भर से सचिन भी लगातार अपनी फॉर्म से जूझ रहे हैं। इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ फ्लॉप प्रदर्शन के बाद सचिन न्यूजीलैंड और मौजूदा घरेलू सीरीज में इंग्लैंड के खिलाफ भी नाकाम साबित हो रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल है कि जब पॉन्टिंग संन्यास ले सकते हैं तो सचिन को किस बात का इंतजार है। बेशक सचिन के नाम कई उपलब्धियां दर्ज हैं और उन्होंने टीम इंडिया को आज के मुकाम पर पहुंचाने में सबसे बड़ा योगदान दिया है। लेकिन वर्तमान कभी इतिहास का मोहताज नहीं होता।

इसके अलावा पॉन्टिंग ने 62 अर्धशतक भी लगाए हैं। टेस्ट में उनका औसत 52.21 का रहा है जो बहुत कम क्रिकेटर कर पाए हैं। वनडे में भी पॉन्टिंग ने जोरदार प्रदर्शन किया है। कुल 375 वनडे में पॉन्टिंग ने 30 शतकों की मदद से 13704 रन बनाए हैं और उनका औसत रहा है 42 रन प्रति मैच। उन्होंने 82 अर्धशतक भी जमाए हैं। ये आंकड़े गवाह हैं कि पॉन्टिंग ने किस किस्म की क्रिकेट खेली है।
सचिन तेंदुलकर ने अब तक कुल 192 टेस्ट मैच खेले हैं। इन मैचों की 317 पारियों में उन्होंने 15562 रन बनाए हैं और उनका सर्वोच्च स्कोर रहा है 248 रन। इन मैचों में सचिन का औसत 54.60 पॉन्टिंग से बेहतर रहा है। इसके साथ ही शतक बनाने के मामले में भी सचिन पॉन्टिंग से आगे हैं। सचिन ने 51 शतक और 65 अर्धशतक जमा हैं। वनडे में भी सचिन अव्वल नंबर हैं। कुल 463 वनडे मैचों में सचिन ने 49 शतक और 96 अर्धशतक जमाए हैं। वनडे में उनका औसत रहा है 44.83 रन।
आंकड़ों से साफ जाहिर है कि सचिन पॉन्टिंग से कहीं बेहतर हैं। सचिन तेंदुलकर ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में कदम 1989 में रखा था। नवंबर 1989 में सचिन ने पाकिस्तान के खिलाफ पहली बार कराची टेस्ट से क्रिकेट में पदार्पण किया। सचिन करीब 23 सालों से क्रिकेट खेल रहे हैं। जबकि रिकी पॉन्टिंग ने 15 फरवरी 1995 को साउथ अफ्रीका के खिलाफ अपने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट करियर की शुरुआत की थी। यानी सचिन से 5 साल बाद। इस दौरान सचिन टेस्ट में 8 शतक और वनडे में 2 शतक जमा चुके थे। लेकिन जब दोनों ने साथ खेलना शुरू किया तो पॉन्टिंग हर वक्त सचिन को चुनौती देते नजर आए।
दोनों क्रिकेटरों में कुछ और समानताएं भी हैं। दोनों कम ही टी-20 खेलते हैं। पॉन्टिंग ने करीब एक साल से वनडे क्रिकेट से भी दूरी बना ली थी। सचिन भी चुनिंदा टीमों के खिलाफ ही वनडे खेलते हैं। इसके अलावा पिछले कुछ समय से दोनों खिलाड़ियों के टेस्ट प्रदर्शन पर सवाल उठ रहे थे। खासतौर पर सचिन ने पिछली 3 सीरीज और मौजूदा इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू सीरीज में जिस तरह का प्रदर्शन किया है, उसने उनके संन्यास की बातें उठने लगी हैं।
बहरहाल, पॉन्टिंग के संन्यास लेने के बाद सवालों का दौर और तीखा होने जा रहा है। टीम में बने रहने का एकमात्र आधार मौजूदा फॉर्म होता है ना कि पुराने आंकड़े। पॉन्टिंग ने इस बात को समझा और रिटायरमेंट का ऐलान कर दिया। क्या सचिन ये बात समझ पाएंगे। सचिन ने ना सिर्फ अपने खेल बल्कि अपने व्यवहार से भी देशवासियों का दिल जीता है। क्या अब वक्त नहीं आ गया है कि सचिन अपनी छवि और सम्मान को बरकरार रखते हुए देशवासियों की भावना को समझें।
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