नई दिल्ली। एफडीआई पर लोकसभा में नियम 184 के तहत चर्चा को हरी झंडी मिलते ही, समाजवादी पार्टी और उसके मुखिया मुलायम सिंह यादव फंस गए हैं। एफडीआई के खिलाफ भारत बंद में शामिल हो चुके और लगातार बयानबाजी कर रहे मुलायम के लिए ये मामला गले की हड्डी बन गया है। सपा को सूझ नहीं रहा कि वो करे तो क्या करे। संसद में एफडीआई के खिलाफ वोटिंग की तो सरकार से रिश्ते बिगड़ेंगे और अगर समर्थन में वोट दिया तो जनता के सामने बेनकाब होंगे। ऐसे में अब मुलायम कह रहे हैं कि मौका देखकर ही फैसला लिया जाएगा। उन्होंने इशारों-इशारों में ये भी कह दिया कि राजनीति में कुछ भी पहले से तय नहीं होता है।
सपा में किस हद तक कनफ्यूजन की स्थिति है इसका पता इसके प्रमुख नेताओं के बयानों से भी लगता है। मुलायम सिंह यादव से जब वोटिंग के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि सर्वदलीय बैठक में हमारे प्रतिनिधि ने साफ कहा था कि इस मुद्दे पर चर्चा होनी चाहिए। पार्टी का रुख क्या होगा, इस मुद्दे पर उन्होंने कहा कि मौका देखा जाएगा। राजनीति में कब क्या करना पड़ जाए इसकी पहले से भविष्यवाणी थोड़े ही की जा सकती है। जहां तक एफडीआई का सवाल है समाजवादी पार्टी इसके पुरजोर विरोध में है।

समाजवादी पार्टी के महासचिव मोहन सिंह का कुछ और ही कहना है। उन्होंने करीब-करीब सपा की भूमिका साफ कर दी। उनका कहना है कि एफडीआई पर अगर बीजेपी वोटिंग करा रही है तो समाजवादी पार्टी सरकार के साथ है। समाजवादी पार्टी बीजेपी के खिलाफ खड़ी है। जब उनसे इस मुद्दे पर सरकार की भूमिका पूछी गई तो उन्होंने कहा कि सरकार सभी चीजों को उलझाकर अपना काम बनाने के चक्कर में है।
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