हिसार। शतरंज बच्चों को बेहतर विचारक और युद्ध के मैदान में श्रेष्ठ सेनापति बना सके इसके लिए हरियाणा शतरंज एसोसिएशन ने विशेष मुहिम शुरू करने का निर्णय लिया है।
हरियाणा शतरंज एसोसिएशन (एचसीए) ने राज्य में शतरंज को तमिलनाडु, गोवा और गुजरात की तर्ज पर पाठयक्रम में विषय के रूप में शामिल करने की मांग उठाई गई है। शतरंज की पूरी जानकारी एचसीए की वेबसाइट डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट इंडियनचेस डॉट ओआरजी पर देखी जा सकती है। यह जानकारी हरियाणा शतरंज एसोसिएशन (एचसीए) के महासचिव कुलदीप शर्मा ने गुरुवार को यहां दी।

उन्होंने बताया कि राज्य के कुछ स्कूलों में छात्रों को शतरंज सिखाने की पायलट योजना बनाई जा रही है। यह निर्णय कई शोधों के आधार पर लिया गया है। इनके अनुसार राजाओं का शौक समझे जाने वाले इस खेल से एकाग्रता और स्मरण शक्ति बढ़ती है। इससे बच्चों का शैक्षणिक प्रदर्शन भी बेहतर होता है। शतरंज में माहिर बच्चों के लिए अलग से शतरंज अकादमी बनाई जाएगी।
शर्मा ने बताया कि यह भी माना जा रहा है कि ज्यादातर बच्चे वीडियो गेम में दिमाग लगाते हैं। कई वीडियो गेम हिंसक हैं जिससे बाल मन पर दुष्प्रभाव पड़ता है और उनमें हिंसक भावनाएं बढ रही हैं। इन्हें रोकने के लिए शतरंज का इस्तेमाल बेहतर साबित हो सकता है।
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