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रिमांड होम मामले में हुई कार्रवाई पर उठे सवाल

| Nov 29, 2012 at 10:04pm | Updated Nov 29, 2012 at 10:14pm

मुंबई। मुंबई में नवजीवन महिला सुधार गृह में 200 से ज्यादा महिलाओं के साथ यौन शोषण और टॉर्चर के सनसनीखेज खुलासे के बाद भी राज्य सरकार और पुलिस के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी है। आईबीएन 7 ने इस सुधार गृह की जांच करने वाली हाई कोर्ट की कमेटी की रिपोर्ट आपको बुधवार को दिखाई थी, उस खुलासे से हड़कंप मचा लेकिन सरकार ने सिर्फ कुछ अफसरों के निलंबन और तबादलने का फरमान जारी कर रस्म अदायगी कर दी। पीड़ित महिलाओं के बयानों के आधार पर न तो एफआईआर दर्ज हुई न ही कोई गिरफ्तारी।

हाई कोर्ट की बिठाई जांच कमेटी ने मुंबई के बीचोंबीच मानखुर्द में नवजीवन महिला सुधार गृह को जिंदा नर्क करार दिया लेकिन पुलिस ने अब भी रोती बिलखती इन लड़कियों के बयानों को गंभीरता से नहीं लिया, इन बयानों के आधार पर आज तक एक भी एफआईआर दर्ज तक नहीं की। सरकार ने केवल बाल और महिला विकास मंत्रालय ने 4 वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की। रिमांड होम की पूर्व सुपरिटेंडेंट नीरू शर्मा जो कि सितंबर तक रिमांड होम इंचार्ज थीं उन्हें सस्पेंड कर दिया गया। जिला महिला व बाल विकास अधिकारी आनंद खंडागले को सस्पेंड करने की सिफारिश मुख्यमंत्री दफ्तर से की गई। डिप्टी कमिश्नर महिला और बाल विकास रवि पाटिल का तबादला कर दिया गया। कमिश्नर राजेन्द्र चव्हाण को कारण बताओ नोटिस जारी हुआ। तीन और कर्मचारियों को भी सस्पेंड कर दिया गया है जिनमें केयरटेकर भी शामिल है।

जांच रिपोर्ट पर चुप्पी साधे बैठी महाराष्ट्र सरकार अब कार्रवाई करती नजर आ रही है। लेकिन ये कार्रवाई है या कार्रवाई का दिखावा ये समझना मुश्किल नहीं। क्योंकि रिमांड होम में रहने वाली महिलाएं जिस यातना से गुजर हैं वो आपाराधिक मामला है। क्या आपराधिक मामले में सिर्फ निलंबन और तबादला ही पर्याप्त है।

आखिर पुलिस क्यों चुप बैठी है। जब बांबे हाई कोर्ट अपने आप इस केस को संज्ञान में लेकर कार्रवाई कर सकता है तो फिर पुलिस के हाथ पैर आखिर किसने बांधे हुए हैं। पीड़ित लड़कियों ने हाई कोर्ट की जांच कमेटी से साफ कहा था कि रिमांड होम की केयरटेकर रात में खुद को एक कमरे में ताले में बंद कर लेती है और उन्हें बाहर से सुधार गृह में घुसने वाले पुरुषों के रहमोकरम पर छोड़ दिया जाता है।

जांच रिपोर्ट में महिला सुधार गृह में मौजूद एक लड़की के गर्भवती होने पर सवाल खड़े किए गए। जांच कमेटी की रिपोर्ट में साफ लिखा गया है कि इस महिला सुधार गृह से 3 लड़कियां लापता हो गईं जिनका कोई सुराग नहीं मिला। उनकी बैरक का कोई ताला खुला हुआ नहीं मिला।

महिला सुधार गृह की लड़कियों ने जांच कमेटी के सामने बयानों में जैसी यातनाओं का जिक्र किया वो साफ-साफ आपराधिक मामला है। ऐसे में सवाल है कि आखिर क्यों किसी के भी खिलाफ कोई एफआईआर तक दर्ज नहीं की गई।

साफ है सरकार और पुलिस के लिए ये अपराध जघन्य नहीं है, उसके लिए 200 से ज्यादा उन लड़कियों की जिंदगी और इज्जत शायद मायने नहीं रखती।

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