नई दिल्ली। आपके लिए रेडियो मनोरंजन का एक जरिया होगा। लेकिन स्वात घाटी में रेडियो खौफ का दूसरा नाम बन चुका है। क्योंकि जब-जब वहां रेडियो बजता है सुनाई देता है एक फरमान। तालिबान ने इस बार अपने नए हुक्म में वकीलों को कोर्ट जाने से मना कर दिया है। पहले लड़कियों के स्कूल जाने पर पाबंदी फिर राजनेताओं को तालिबान की अदालत में पेश होने की धमकी और अब वकीलों पर निशाना।
दरअसल तालिबान ने फरमान जारी कर वकीलों को आदेश दिया है कि वो अदालत में जाना बंद कर दें, वकालत करना छोड़ दें। नहीं तो जान से मार दिए जाएंगे। इस आदेश के बाद घाटी के वकील स्थानीय आतंकवादी कमांडरों से संपर्क कर इस बात का भरोसा दिला रहे हैं कि वो तालिबान की हर बात को मानेंगे। इससे पहले तालिबान नेताओं के खिलाफ फरमान जारी किया था। सिर्फ नेताओं को ही नहीं बल्कि उनके पूरे परिवार को भी तालिबान के दरबार में पेश होने का हुक्म दिया गया था।
पाकिस्ताम में तालिबान के कमांडर मुल्ला फजलुल्लाह के फरमान के मुताबिक ये सारे लोग स्वात घाटी में तालिबान के बढ़ते कदमों को रोकने की कोशिश कर रहे है और ऐसे ये लोग मुजरिम हैं। आप उसके दुस्साहस का अंदाजा इसी बात से लगा सकते है कि उसने इन सारे लोगों को जिन में सरकार के मिनिस्टर भी शामिल है अपने सामने पेस होने का हुक्म दे दिया ताकि उनके खिलाफ मामला चला कर उनको सजा दी जा सके। तालिबान के इस ऐलान के बाद 40 में से 39 लोग अपना घरबार छोड़कर इस्लामाबाद चले गए हैं।








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