नई दिल्ली। डायरेक्टर पीटर जैक्सन द्वारा निर्देशित फिल्म ‘द होबिट- एन अनेक्स्पेक्टेड जर्नी’ पूरे दो घंटे चालीस मिनट की फिल्म है, अगर आप उन 15 मिनट को ना गिनें जो उसके एंड क्रेडिट रोल में जाते हैं। खूबसूरत विजूअल और लाजवाब स्पेशल इफेक्ट्स के बावजूद जैक्सन की इस थ्रीलर फिल्म का पहला सेगमेंट बेहद लंबा और हद से ज्यादा खिंचा हुआ लगता है। जैक्सन बहुद ही चालाकी से ऐसा सेटअप तैयार करते हैं जो अगली दो फिल्मों में उठाये जायेंगे।
एक सीक्वंस जिसमे दो पहाड़ जीवित हो एक दूसरे से झगड़ रहे है, फिल्म का एक बेहद उत्साहित और थ्रीलिंग सीन है और जैक्सन ऐसे सीन को बखूबी शूट और एडिट करना जानते है जिसमें की आप महज उसके शानदार विसुअल को एन्जॉय कर सकें। फिर भी सच ये है की इस पूरे हंगामे और हलचल में कहानी की तौर पर कुछ भी ख़ास नहीं होता।

फिल्म फिल्म ‘द होबिट- एन अनेक्स्पेक्टेड जर्नी’ में वो वंडर नहीं है जो फिल्म ‘द लॉर्ड ऑफ द रिंग्स’ सागा में भरपूर शामिल था, वो फिल्में नई और उत्साह भरी थी जो हमने पहले कभी नहीं देखी थी। फिर भी हम होबिट में बेहतरीन फिल्ममेकिंग स्किल से इंकार नहीं कर सकते। मैं पीटर जैक्सन की फिल्म ‘द होबिट- एन अनेक्स्पेक्टेड जर्नी’ को पांच में से तीन स्टार देता हूं। अगर आप इससे बहुत बड़ी उम्मीदें ना रखें तो आप जरूर खुश होंगे।
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