वाशिंगटन। जब किसी स्थान पर लंबे समय तक पानी उपस्थित रहता है तो वहां गिली मिट्टी के खनिज और चट्टानें आमतौर पर बनती हैं। मंगल ग्रह का एक विशाल हिस्सा गिली मिट्टी और चट्टानों से ढका हुआ है। यह हिस्सा पूर्व अनुमानित हिस्से से अधिक है।
जॉर्जिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलॉजी में सहायक प्रोफेसर जेम्स व्रे और उनकी टीम ने कहा है कि अपॉर्चुनिटी अंतरिक्ष यान द्वारा अध्ययन की गई कुछ चट्टानों में गिली मिट्टी पाई गई थी। अपॉर्चुनिटी 2004 में मंगल पर ईगल क्रेटर में पहुंचा था।

जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स पत्रिका ने कहा है कि यह अंतरिक्ष यान केवल एसिडिक सल्फेट का ही पता लगा पाया था और वहां से लगभग 22 मील दूर एंडेवर क्रेटर पहुंचा था, उस इलाके में जहां व्रे ने 2009 में गिली मिट्टी होने का अंदेशा जताया था।
इस परियोजना का नेतृत्व जॉर्जिया के ग्रह विज्ञान संस्थान के एल्डेर नोए डॉब्रिया ने किया है और उन्होंने एक स्पेक्ट्रोस्कोपिक विश्लेषण के जरिए गीली मिट्टी के खनिजों की पहचान की है।
जॉर्जिया इंस्टीट्यूट की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, अनुसंधानकर्ताओं ने बताया है कि मेरिदियानी के मैदानों में भी गीली मिट्टी मौजूद है और अपॉर्चुनिटी ने जब अपने मौजूदा स्थान की ओर प्रस्थान किया था, तो उस दौरान वह इस गीली मिट्टी के हिस्से से होकर गुजरा था।
व्रे ने कहा है कि खोज के दौरान अपॉर्चुनिटी द्वारा गीली मिट्टी का पता न लगा पाना कोई आश्चर्यजनक नहीं है। हमें इस अंतरिक्ष यान के मंगल पर पहुंचने से पहले तक गीली मिट्टी के वहां होने के बारे में पता नहीं था।
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