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शराब माफिया के खिलाफ खड़ी हुई महिलाएं

Posted on Feb 09, 2009 at 13:49 | Updated Feb 09, 2009 at 14:37

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अहमदाबाद। आजादी के बाद जिस राज्य ने सबसे पहले शराब पर रोक लगाई वो था गांधी का गुजरात। लेकिन हकीकत में ये रोक सिर्फ कागजों पर दर्ज है। शराब की गैरकानूनी भट्टियां गांव-गांव में चल रही हैं। नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ती हैं और शिकायत करने पर भी अधिकारी कुछ नहीं करते।

शराब की इस बुराई से जब घर उजड़ने लगे तो गुजरात की महिलाओं ने इसके खिलाफ कमर कसी और इन्हीं में से एक मीना बेन ने शराब बंदी की मुहिम छेड़ी। उन्होंने सखी मंडल के जरिये गुजरात में शराब की भट्टियों को पूरी तरह से बंद कराने की मुहिम छेड़ी है। इन शराब की भट्टियों ने कई लोगों की जिंदगियां बर्बाद कर रखी है।

मीना बेन के अनुसार सूरत से 70 किमी दूर वहेवल गांव की महिलाएं खुले आम बनती और बिकती देसी शराब से परेशान थीं। एक दिन कुछ महिलाएं उनके पास आईं और हमने ये तय किया कि अब हम अपने आसपास से इस विकार को जड़ से मिटाकर ही दम लेंगे। इसके बाद हम सभी ये मसला पुलिस के पास लेकर गए मगर पुलिस ने इस बात पर कुछ ध्यान नहीं दिया।

उस वक्त पुलिस की तरफ से कोई कार्रवाई न होने पर हमने मामला अपने हाथों में लेने का फैसला किया। पुलिस का साथ न मिलने पर मीना बेन ने गांव की महिलाओं के साथ खुद ही आसपास की शराब की भट्टियों को बंद करवाना शुरू कर दिया। शराब की भट्टियां बंद करवाने के अलावा महिलाओं ने लोगों को नशे से दूर रहने के लिए जागरूक करना शुरू किया।

नतीजा ये निकला कि शराब बंदी को लेकर जिस प्रशासन ने अपने हाथ खड़े कर रखे थे वो भी इन महिलाओं की वजह से अब हरकत में आ गया है। 3 जनवरी को सूरत के एक छोटे से गांव से शुरू हुआ ये अभियान थोड़े ही वक्त में नवसारी और तापी जिलों तक पहुंच गया है। आज इस मुहिम में पांच हजार से ज्यादा महिलाएं शामिल हैं।





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