सिडनी। बात-बात पर धौंस दिखाने और गाली गलौच करने वाले लोग जज्बाती माहौल में भी समानुभूति और प्यार जताने से परहेज करते हैं। उन्हें यह डर सताता है कि ऐसा करने से लोगों की नजर में उनकी कड़क छवि शक के दायरे में आ सकती है।
क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (क्यूयूटी) में शोध की छात्रा क्लेयर मर्फी ने ऐसे 16 लोगों के व्यवहार पर गहन शोध और उनके साक्षात्कार के आधार यह निष्कर्ष निकाला जिनका अपने जीवनसाथी या प्रेमिका पर शारीरिक, भावनात्मक, वित्तीय और यहां तक कि यौन संबंध के मामले में भी पूर्ण नियंत्रण रहा है। ऐसे लोग दूसरे मर्दो की नजर में श्रेष्ठ बने रहने के लिए गमगीन या जज्बाती माहौल में भी प्यार या समानुभूति जताने से परहेज करते हैं। उन्हें ऐसा व्यवहार पुरुषोचित लगता है।
ऐसे लोगों को पौरुष श्रेष्ठता के पायदान से खिसकने का डर सताता है। वे इसे समाज में अपना दबदबा बनाए रखने का तरीका मानते हैं। वह कहती हैं कि इनमें से अधिकांश ने छात्र जीवन के दौरान स्कूल में दबदबा कायम करने के लिए यह राह चुनी। उन्होंने स्कूल में छात्रों के बीच स्वीकार्यता हासिल करने के लिए शिक्षकों, छात्रों, कोच के साथ दुर्व्यवहार का रास्ता चुना।
मर्फी ने न्यूजीलैंड के हैमिल्टन एब्यूज इंटरवेंशन प्रोजेक्ट से जुड़कर यह शोध किया है।
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