कुशीनगर। एक गांव में एक के बाद एक 50 बच्चों की मौत हो गई, उनकी हत्या नहीं की गई थी। दरअसल वो बच्चे अपने गांव का प्रदूषित पानी पीने को मजबूर थे। इसलिए उनकी जान गई। यूपी के कुशीनगर में ये हादसा पांच साल पहले हुआ था। इस घटना के बाद प्रशासन ने साफ पानी के लिए टंकी बनाने का फैसला किया। लेकिन सिटिजन जर्नलिस्ट वैद्यनाथ सहानी बता रहे हैं कि सालों बीत जाने के बाद भी हालात क्या है।
कुशीनगर में 2006-2007 में अज्ञात बीमारी के कारण करीब 50 बच्चों की मौत हो गई थी। लेकिन हालात अब भी ज्यादा नहीं बदले हैं। आज भी इलाके़ के ज़्यादातर बच्चे पेट से जुड़ी बीमारियों से परेशान हैं। हालांकि जिले का दूसरा सबसे बड़ा गांव है खोतही। लेकिन है सबसे ज्यादा पिछड़ा हुआ। 6 साल पहले जब गांव में एक महीने के अंदर बच्चों की मौत हुई थी तो उस वक्त खूब हो हल्ला हुआ। मंत्रियों ने दौरे किए और डॉक्टरों की टीम ने जांच। जांच में बीमारी का तो पता नहीं चला, लेकिन रिपोर्ट में डॉक्टरों ने बताया कि यहां पर पानी पीने लायक नहीं है और ये प्रदूषित हो चुका है।

इसके बाद सरकार ने इलाके में आला दर्जे के हैंडपंप लगाए और फैसला लिया कि करीब 3 करोड़ रुपये की लागत से यहां पर पानी की टंकी का निर्माण किया जाएगा। अप्रैल 2010 में जल निगम को पानी की टंकी बनाने का जिम्मा दिया गया। 850 किलोलीटर पानी की क्षमता वाली टंकी को मार्च 2012 तक तैयार हो जाना चाहिए था। लेकिन यहां पर इन दो सालों में सिर्फ बोरिंग और टंकी बनने वाली जगह पर बाउंड्री वॉल का काम हुआ है। लेकिन पानी की टंकी कब बनेगी ये किसी को नहीं पता।
टंकी का निर्माण जल्द हो इसके लिए जल निगम के साथ जिलाधिकारी को भी पत्र लिखा गया। लेकिन जल निगम की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। वहीं जिलाधिकारी ने टंकी के निर्माण में हो रही देरी की जांच का आश्वासन तो दिया। लेकिन ज्यादा जरूरी है इलाके के लोगों के लिए साफ पानी की व्यवस्था।
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