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6 किलोमीटर के 180 रुपए! ये हैं दिल्ली के ऑटो वाले

| Jan 16, 2013 at 04:37pm | Updated Jan 16, 2013 at 10:01pm

नई दिल्ली। ऑटो वालों की मनमानी के खिलाफ आईबीएन 7 की टीम दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में पहुंची। मकसद था ये जानना कि आखिर 16 दिसंबर की गैंगरेप की घटना के बाद क्या दिल्ली के ऑटो वालों में कोई परिवर्तन हुआ या फिर इनका रवैया वही पहले जैसा ही है। इस बार मंजिल थी वो जगह जहां पर पूरे भारत से लोग पहुंचते हैं, यानि पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन।

16 दिसंबर की गैंगरेप की वारदात के बाद क्या ऑटोवालों में कोई बदलाव हुआ। ये जानने के लिए दिल्ली के तीन रेलवे स्टेशन का जायजा लिया। पहली मंजिल थी दिल्ली का सबसे पुराना रेलवे स्टेशन। ये इलाका दिल्ली 6 के नाम से मशहूर है। पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन से आईटीओ जाना चाहते थे।

रिपोर्टर- आईटीओ जाना है।

ऑटो चालक- कितनी सवारी है।

रिपोर्टर - एक।

कुछ भी कहे बिना ये ऑटो वाला वहां से हट गया। हमने दूसरे ऑटो वाले से बात की।

रिपोर्टर- आईटीओ कितने पैसे।

ऑटो चालक- आईटीओ पर कहां जाना है।

रिपोर्टर- आईटीओ पर पड़ता है ट्रांस्को का ऑफिस। बिजली डिपार्टमेंट का ऑफिस। कितने पैसे।

ऑटो चालक- 150 रुपए।

रिपोर्टर- आईटीओ कितना 150 रुपए।

ऑटो वाले ने 150 रुपए मांगे। आपको बता दें कि पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन से आईटीओ पर मौजूद बाल-भवन की दूरी करीब 6 किलोमीटर है । जिसका किराया 45 रुपए होता है। लेकिन ऑटोवाला तिगुने से भी ज्यादा किराया मांग रहा था। यहीं नहीं वो तो कहने लगा कि वो कम किराया मांग रहा है।

रिपोर्टर- 150 रुपए तो ज्यादा है यार।

ऑटो चालक- अगर ऑटो नंबर से लगा है तो 30 रुपए नंबर के लगेंगे वो भी नहीं लगाया।

रिपोर्टर -30 रुपए नंबर के मतलब।

ऑटो चालक- लाइन।

रिपोर्टर- 30 रुपए नंबर के मतलब।

ऑटो चालक- यहां स्टैंड पर हमारे 30 रुपए जाएंगे। बचेंगे 120 रुपए। समझ गए न अगर 30 रुपए और जोडों दे तो 180 रुपए बनता है।

ये ऑटो वाला पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन से आईटीओ का किराया 180 रुपए बताता है। दूसरे कई ऑटो वालों से बात की, लेकिन कोई भी मीटर से चलने के लिए तैयार नहीं हुआ। तब मीटर से चलने वाले ऑटो वाले की तलाश में पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के बाहर निकल गए। एक ऑटो वाले से आईटीओ चलने के लिए कहा।

रिपोर्टर- यार ऐसा तो नहीं पता मुझे, मीटर से ले चलो।

ऑटो चालक- मीटर से, स्टेशन है यहां, दो-दो, ढाई घंटे इंतजार करते हैं यहां।

रिपोर्टर- मतलब मैं समझ नहीं पाया स्टेशन है तो?

ऑटो चालक- 90 रुपए दे देना भइया।

रिपोर्टर- नहीं, लेकिन मीटर से क्यों नहीं ले जाओगे।

ऑटो चालक- यहां स्टेशन है नप्रीपेड चलती है। रोड पर मीटर चलती है। स्टेशन पर प्रीपेड चलती है।

पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर कई ऑटोवालों से बात की लेकिन कोई भी मीटर से चलने को तैयार नहीं हुआ। काफी कोशिशों के बाद एक ऑटो वाला मिला जो मीटर से चलने के तैयार हुआ, लेकिन बहस के बाद।

रिपोर्टर- ट्रांस्को चलोगे ट्रास्को का ऑफिस आईटीओ पर।

ऑटो चालक-आईटीओ पर।

रिपोर्टर- हां

ऑटो चालक- चलेंगे।

रिपोर्टर- कितने पैसे।

ऑटो चालक- 50 रुपए।

रिपोर्टर- मीटर से या बिना मीटर के।

ऑटो चालक- बिना मीटर के।

रिपोर्टर- चलो मीटर भी डाउन कर दो देखेंगे कितना बैठेगा। ठीक है।

थोडी देर में अपनी मंजिल पर पहुंचने के बाद।

रिपोर्टर- कितने हुए, उसमें कितने हुए।

ऑटो चालक- उसमें क्या देखोगे।

रिपोर्टर- 45 रुपए हुए उसमें।

ऑटो चालक- फिर मैंने मांगा ही क्या।

रिपोर्टर- भाई रुपया किलोमीटर बढ़ा लिया आपने 5 किलोमीटर बैठा पूरा।

ऑटो चालक- मैंने आपसे कहा न 5 किलोमीटर होगा। 5 रुपए फालतू मांगे कोई ज्यादा थोड़ी मांगा।

देखा आपने, ये हैं ऑटो वालों की मनमानी। जिस जगह तक जाने का किराया कुल 45 रुपए होता है उस जगह तक मांगे गए 180 रुपए। सरकार के तमाम दावों के बावजूद दिल्लीवासी इन ऑटो चालकों की मनमानी से परेशान हैं।

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