नई दिल्ली। इंग्लैंड को दूसरे वनडे में रौंदते हुए टीम इंडिया ने राहत की सांस ली है। भले ही भारतीय जीत के हीरो रवींद्र जडेजा रहे हों, लेकिन टीम इंडिया के असली तारणहार तो कप्तान धोनी की कप्तानी पारी रही। धोनी ने 66 गेंदों पर 75 रनों की शानदार पारी खेलकर एक बार फिर साबित कर दिया है वो भारतीय बल्लेबाजों में सबसे बड़े दबंग हैं।
दरअसल महेंद्र सिंह धोनी का बल्लेबाजी में बेमिसाल प्रदर्शन बदस्तूर जारी है और कोच्चि वनडे इसकी एक और मिसाल है। बीते डेढ़ साल में विकेट कीपिंग का दबाव और कप्तानी का तनाव कभी भी धोनी की बल्लेबाजी पर नहीं दिखा। विश्व कप फाइनल में 91 रन की बेमिसाल पारी खेलने के बाद धोनी के बल्लेबाजी के आंकड़ों पर गौर करें तो 2 अप्रैल 2011 से अब तक धोनी ने 31 मैच खेले हैं, जिसमें उन्होंने करीब 90 की औसत से (89.78) से 1257 रन बनाए हैं। इस दौरान उनका औसत 93 से ज्यादा का रहा है और उन्होंने 1 शतक और 11 अर्धशतक लगाए हैं।

कोच्चि वनडे में हेलिकॉप्टर शॉट से इंग्लैंड को बेजार करने वाले धोनी के आंकड़ें शानदार हैं लेकिन जब धोनी अपनी जमीन पर खेलते हैं तो उनके लगभग अजेय हो जाते हैं। विश्व कप के बाद से धोनी ने 11 मैचों में बल्लेबाजी करते हुए 203 की औसत से 610 रन बनाए हैं, उनका स्ट्राइक रेट इस दौरान 97 का रहा और वो 7 बार नॉट आउट रहे हैं।
कहने वाले कहते हैं कि धोनी जिस नंबर पर बल्लेबाजी करते हैं वहां पर नॉट आउट और औसत जैसे आंकड़ें बेमानी हो जाते हैं। लेकिन नंबर 7 पर धोनी कई भूमिकाएं निभाते हैं। चेन्नई में जब टीम 5 विकेट 30 रन पर गंवा देती है तो पारी संभालते भी हैं और कोच्चि में जब जरूरत हो तो टीम को बड़े स्कोर तक पहुंचाते भी हैं और ये काम बल्ले का सबसे बड़ा बाजीगर ही कर सकता है।
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