मासूम बेटी से दरिंदगी, इंसाफ के लिए भटक रहा है पिता

| Feb 05, 2013 at 03:56pm | Updated Feb 05, 2013 at 04:13pm

कानपुर। दिल्ली में हुए रेप कांड के बाद पुलिस के रवैये में कुछ बदलाव देखने को भले मिला हो, लेकिन अब भी कई मामले ऐसे हैं जहां लोग न्याय पाने के लिए भटक रहे हैं। कानपुर में करीब 4 महीने पहले 7 साल की बच्ची का रेप हुआ। इतना वक्त गुजर गया है, लेकिन आरोपियों को पकड़ना तो दूर पुलिस अभी उनकी पहचान तक नहीं कर पाई है।

पुलिस के रवैये से परेशान पीड़ित लड़की का पिता अपनी बेटी की आवाज उठाने के लिए सिटीजन जर्नलिस्ट बने। पीड़ित लड़की के पिता कानपुर में रहते हैं और करीब 4 महीने पहले उनके हंसते खेलते परिवार को नजर तब लगी जब एक शाम उनकी सात साल की बेटी अपनी मां के साथ रामलीला देखने गई थी। रामलीला में वहां कोई उसे बहला फुसला कर अपने साथ ले गया और जब वो मिली तो खून से लथपथ थी।

लड़की रामलीला से करीब आधा किलोमीटर दूर मिली थी। लड़की को किसी तरह अस्पताल लाया गया। लड़की की हालत बेहद खराब हो गई थी और खून रुकने का नाम नहीं ले रहा था। करीब 20 दिन तक अस्पताल में रहने के बाद डॉक्टरों ने किसी तरह लड़की को बचाया। लड़की के पिता मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पालते हैं। ना तो उनकी बेटी अबतक ठीक हुई और ना ही उन गुनहगारों का पता चला जो इसके लिए दोषी हैं।

लड़की के अबतक दो ऑपरेशन हो चुके हैं, लेकिन उसकी हालत अब भी ठीक नहीं है। डॉक्टरों का कहना है कि जिंदा रहने के लिए लड़की का एक और ऑपरेशन होना जरूरी है। लड़की के पिता का कहना है कि उनकी समस्या रोजी-रोटी की ही नहीं बल्कि बेटी का इलाज भी प्राथमिकता में है।

गुनहगारों को सजा दिलाने के लिए वो कई बार पुलिस अफसरों से मिले लेकिन ज्यादा कुछ नहीं हुआ सिवाय शिनाख्त परेड के। लड़की के पिता ने कहा कि शिनाख्त परेड महज खानापूर्ति थी, उलटे पुलिस अब दबाव बना रही है कि हम ही उसकी मदद को आगे नहीं आ रहे।

मजबूर होकर लड़की के पिता ने सिटीजन जर्नलिस्ट टीम की मदद से पुलिस अफसरों से जानना चाहा कि मामले की जांच की कार्रवाई कहां तक पहुंची। पुलिस अफसरों ने उनकी बात सुनी और भरोसा दिया, लेकिन लड़की के पिता ने कहा कि जब तक ये भरोसा हकीकत में नहीं बदलता तब तक वो चैन से बैठने वाले नहीं हैं।

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