नई दिल्ली। सिटीजन जर्नलिस्ट में एक पिता ने कुछ बेहद अहम सवाल उठाए हैं। उनकी 6 साल की बच्ची का रेप हुआ, गुनहगार अबतक पकड़ा नहीं जा सका है, लेकिन बच्ची बार बार मानसिक प्रताड़ना से गुज़र रही है। उसकी वजह है पहचान परेड। हर बार बच्ची के सामने कई आदमी खड़े कर दिए जाते हैं और उस बच्ची से दरिंदे को पहचानने के लिए कहा जाता है।
पीड़ित लड़की के पिता का कहना है कि उनकी 6 साल की बेटी को आम बच्चों की तरह अपने दोस्तों के साथ दिन भर खेलना और मस्ती करना बेहद पसंद था। लेकिन 19 सितंबर 2012 को सब कुछ बदल गया, जब एक अनजान आदमी की बुरी नजर उस पर पड़ी। थक हारकर पीड़ित लड़की के पिता को सिटीजन जर्नलिस्ट बनना पड़ा।

लड़की के पिता ने बताया कि सफदरजंग अस्पताल में एमएलसी में लिखा गया कि बच्ची के पूरे जिस्म पर खरोंचें और चोट के निशान थे। तब से बेटी बेहद तकलीफ में है, उसके जहन में उस दिन का खौफ़ आज भी इतना है कि वो सोते वक्त चिल्लाने लगती है और डरकर उठ जाती है। पिछले चार महीनों में चार बार शिनाख्त परेड कराई जा चुकी है। मेरी बेटी से कहा गया कि 50 लोगों में से वो उस दरिंदे को पहचाने। लेकिन आरोपी पहचाना नहीं जा सका। ताज्जुब की बात ये है कि उसे ऐसे लोगों में से मुजरिम को पहचानने के लिए कहा जाता है जिनका हुलिया उस तस्वीर से जरा सा भी मेल नहीं खाता, जो मेरी बेटी ने उस गुनहगार की बनवाई थी।
इस मामले में सिटीजन जर्नलिस्ट टीम ने नारायणा पुलिस थाने में जाकर ये जानना चाहा कि इस केस में अब तक क्या कार्रवाई हुई है, लेकिन कैमरा पुलिस स्टेशन के बाहर ही रोक दिया गया। पुलिस ने यह आश्वासन दिया कि आरोपी का स्केच हर जगह लगवा दिया गया है और जल्द ही वो पकड़ा जाएगा। पुलिस के आश्वासन मिलने के बाद जब इलाके का जायज़ा लिया गया तो कहीं भी किसी दीवार पर ऐसा स्केच चिपका नहीं दिखा। लड़की के पिता का कहना है कि इंसाफ मिलने तक वह अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।
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