छेड़छाड़ और अपमान के खिलाफ लड़कियों ने चलाई मुहिम

| Feb 12, 2013 at 06:04pm | Updated Feb 12, 2013 at 06:17pm

शाजापुर। छेड़छाड़ का शिकार लड़की अब चुपचाप जहर का घूट पीने के लिए मजबूर ना हो इसके लिए शाजापुर की कुछ लड़कियों ने रास्ता निकाला है। अब वो हर एक लड़की को ऐसा मंच दे रही है जिससे छेड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो सके। लड़कियों का कहना है कि हम रोज़ स्कूल आते हैं। हमारे उपर कमेंट पास होते हैं। तब हमारे पास कोई उपाए भी नहीं होता।

इनका कहना है कि जब हम कोचिंग जाते है या स्कूल के लिए जाते हैं तो लड़के पीछे से आते है और कमेंट मार कर चले जाते है। जैसे आई लव यू या जान । कुछ तो भी गंदे गंदे वर्ड होते हैं हमारे लिए यूज किए जाते है। जैसे, चलती है क्या नौ से ग्यारह, रात में मिल, चल पता तो बता दे चल पता तो बता दे। लेकिन हम कुछ कर भी नही पाते। हमारे पास एबिलिटी होना चाहिए कि हम मुंहतोड़ और करारा जवाब दे सकें।

इनका कहना है कि हम शाजापुर जिले के आगर ब्लॉक के रहने वाले हैं। हर जगह की तरह हमारे इलाके में भी लड़कियों को छेड़ा जाना उनकी सरेआम बेइज़्ज़ती करना आम बात है। लेकिन अब आम बात नहीं होगी क्योंकि हमने छेड़छाड़ के खिलाफ मुहिम शुरू की है। इससे परेशान करने वालों पर काबू पाया जा सके। इस वेब पेज पर जिन लोगों के बारे में लिखा ये वो लोग जो लड़कियों को छेड़ना अपना हक समझते हैं। लेकिन अब इंटरनेट के जरिए इनकी करतूत घर घर पहुंच रही है।

इनमें से एक लड़की कहती है कि मैं हूं शगुफ्ता खान। मैं आपको बताना चाहती हूं कि थोड़ी सी समझदारी और हिम्मत से शोहदों और सड़कछाप मजनुओं से कैसे निपटा जा सकता है। उसकी दोस्त कहती हैं, मैं हूं पूनम ललवानी। शगुफ्ता और अपनी कई दोस्तों के साथ मिलकर हमने एक मुहिम शुरू की है । हमारी कोशिश है कि महिलाए अपनी साथ हुई घटना को बेझिझक बताएं और उन घटनाओं को अंजाम देने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो।

कुछ और लड़कियां शिकायत करती हैं कि स्कूल और बाजार आते जाते हमसे बेहद खराब बर्ताव करते हैं। कभी हमें घूरा जा रहा है। कभी हमारे पास अंजान लोगो के फोन आ रहे है और कभी हम पर गंदे कमेंट किए जाते हैं। हमने ऐसी घटनाओ को उजागर करने के लिए इंटरनेट का सहारा लिया है। हमने फेसबुक पर एक पेज बनाया है। जहां महिलाए अपने साथ हुई किसी भी बदसलूकी को बता सकती है।

हमारे पेज का एड्रेस है दामिनी। इस पर कोई भी महिला अपना नाम बदल कर अपना मैसेज लिख सकती है। वो उस व्यक्ति का नाम भी बता सकती है जो उसे परेशान कर रहा है और किस तरह कर रहा है। हमारे पेज पर महिला की कोई पहचान उजागर नहीं की जाती।

इस पेज पर महिलाएं एक-दूसरे की समस्या पर अपने विचार लिख सकती हैं। एक दूसरे की मदद करने के लिए एक दूसरे को संपर्क कर सकती हैं। हम लड़कियां वक्त निकाल कर फेसबुक पर आए मैसेजेस पर चर्चा करती हैं और परेशानियों को दूर करने का रास्ता निकलती हैं। खासकर हमारी कोशिश है कि कानून की जानकार और एनजीओ की महिलाएं हमारी मुहिम के साथ जुड़ें जिससे हमें और पीड़ित लड़कियो को मार्गदर्शन मिल सके।

अबतक 40 लड़कियां इस मुहिम की सदस्य हो चुकी है। इन्हें लगता है कि अगर इनके इलाकों के स्कूलों और कॉलेजो के टीचर्स इसे देखेंगे तो वो अपने स्कूलों के आसापास सुरक्षा के सही प्रबंध करेगे। इन लड़कियों का कहना है कि अगर हम कुछ लड़कियो को सुरक्षित माहौल दे सके। महिलाओ को छेड़छाड़ के बाद दुख और जहर का कड़वा छूट पीने से बचा सके तो हमारे लिए यही कामयाबी होगी। पुलिस हमारी वेबसाइट पर आई शिकायतों पर कार्रवाई कर परेशान करने वालों को सबक सिखा सकती है, इसलिए हमने पुलिस के अधिकारियों से भी संपर्क किया है।

पुलिस अधिकारी का कहना है कि इनका कान्सेप्ट अच्छा है और ऐसी स्थिति में वे लड़किया भी जो बदनामी के डर से या अपराधी के डर से अपनी समस्या नही बता पाती थी वो भी सामने नहीं आएंगी। उनके द्वारा जो भी जानकारी डाली जाएगी पुलिस उसमें कार्रवाई करेगी। लड़कियां कहती हैं कि अब हम लोग अब कराटे भी सीख रहे है जिसमें हमारे स्कूल का प्रबंधन भी साथ दे रहा है। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि लड़कियां हमारे पास आई थी। तो हमने एक कराटे सिखाने वाला रखा है जो ट्रेनिंग दे रहा है।

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