बीजिंग। अपनी दुर्भाग्यपूर्ण शुरुआत के कारण सफर पूरा न करने वाले टाइटेनिक को उसके मुकाम तक पहुंचाने का जिम्मा अब चीन ने लिया है। चीन टाइटेनिक की प्रतिकृति बना रहा है जो उसी मार्ग पर चलेगी जहां दुर्घटनाग्रस्त हुई पहली टाइटेनिक को जाना था।
दरअसल चीन के नानजिंग मे स्थित जिनलिंग शिपयार्ड ने एक अरबपति ऑस्ट्रेलियाई कारोबारी क्लाइव पाल्मर से एक समझौता किया है जिसके तहत वे दोनों मिलकर ऐतिहासिक टाइटेनिक की प्रतिकृति का निर्माण करेंगे जो सिर्फ एक मॉडल नहीं होगा। यह प्रतिकृति 2016 तक तैयार हो जाएगी। यह पुरानी टाइटेनिक की तरह समुद्री सफर के काबिल होगी और उसकी अधूरी यात्रा को पूरा करेगी।

टाइटेनिक की तरह बनाया जाने वाला यह आलीशान जहाज 270 मीटर लंबा, 53 मीटर ऊंचा होगा और इसके नौ मंजिलों पर कुल 840 कमरे बनाए जाएंगे। इस पर 2400 यात्री और चालक दल के 900 सदस्य एक साथ सफर पर निकलेंगे।
टाइटेनिक की प्रतिकृति का डिजाइन पूरी तरह असली टाइटेनिक जैसा है। इस डिजाइन को नार्वे की डेल्टामार्टिन कंपनी सहित अन्य प्रसिद्ध कंपनियां बना रही हैं।
शिपयार्ड के प्रवक्ता के मुताबिक उन्नत तकनीक से लैस इस जहाज में अत्याधुनिक जीवन रक्षक और संचार प्रणाली रहेगी।
चीनी शिपयार्ड के निदेशक जी बिआओ के मुताबिक असली टाइटेनिक के भव्य भोजनकक्ष की नकल बनाना बेहद मुश्किल है लेकिन जिनलिंग ने अपने 60 साल के इतिहास में कई तरह के उच्चस्तरीय जहाजों का निर्माण किया है।
टाइटेनिक की इस प्रतिकृति के निर्माण के पहले ही शिपयार्ड को दुनिया के कोने-कोने से अग्रमि पंजीकरण के लिए आवेदन आने लगे है। शिपयार्ड का कहना है कि कई लोग तो 2016 में इस जहाज पर यात्रा करने के लिए दस लाख पाउंड तक देने के लिए राजी है।
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