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फिल्म समीक्षा:‘काई पो चे’ साल की बेहतरीन फिल्म

| | Feb 23, 2013 at 03:21pm | Updated Feb 23, 2013 at 06:23pm

मुंबई। ‘काई पो चे’ जिसका मतलब है पतंगबाजी के दौरान सामने वाले को हराने पर जीत के लिए चिल्लाना। डायरेक्टर अभिषेक कपूर की दिल को छूने वाली दोस्ती और कुछ सच्ची घटनाओं पर आधारित ये फिल्म कुछ ऐसा ही कहती है। मिडिल क्लास दुनिया में एक सिंपल सी कहानी बताते हुई अभिषेक कपूर की ये फिल्म उनकी ग्लॉसी ‘रॉक ऑन’ से काफी अलग है।

दोस्ती की कहानियों के प्रति आभिषेक कपूर का मोह मानना पड़ेगा, पर ‘काई पो चे’ में उनका ट्रीटमेंट ज्यादा ईमानदार और रियल लगता है। चेतन भगत की किताब पर बेस्ड इस फिल्म की कहानी है साल 2000 के अहमदाबाद की, जहां तीन बचपन के दोस्त स्पोर्ट्स शॉप कम क्रिकेट अकैडमी खोलने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा देते हैं। अपने स्कूल के दिनों के स्पोर्ट्समैन, गरम दिमाग इशान यानी सुशांत सिंह राजपूत नौजवानों को क्रिकेट कोचिंग देते हैं। ओमी यानी अमित साध इस प्लॉन को साकार करने के लिए अपने लोकल नेता अंकल से मदद लेते हैं, वहीं बिजनेस माइंडेड गोविंद यानी राजकुमार यादव अकाउंट संभालने की जिम्मेदारी लेता है, पर जैसे ही इन चारों के लिए चीजें सुधरती नजर आती हैं, दूसरी तरफ कुछ ऐसी घटनाएं होती हैं जो इनके बिजनेस और सालों पुरानी दोस्ती के लिए खतरा बन जाती हैं।

फिल्म की शुरूआत में हमारे हीरोज की खूबसूरत दोस्ती से फिल्म के अंत के कठोर घटनाओं तक कपूर खूबी के साथ टोन शिफ्ट करते हुए फिल्म को सही पेस देते हैं। हद से ज्यादा क्रिकेट की बातें भले ही नॉन स्पोर्ट्स फैंस को अट्रैक्ट न करे, पर आप इनकी दुनिया में खिंचते चले जाएंगे। भला आप खुद को उस वक्त मुस्कुराने से कैसे रोक पाएंगे जब ये तीनों एक फोर्ट के उपर से समंदर में छलांग लगाते हैं, या अपनी पहली कमाई की खुशी सेलिब्रेट करते समय बस की छत पर बैठते हैं, ‘काई पो चे’ कुछ ऐसे ही मोमेंट्स पर टिकी हुई नहीं रहती।

2001 में होने वाला वो भूकंप जिसने गुजरात को हिला कर रख दिया था, मजेदार इंडिया-ऑस्ट्रेलिया टेस्ट सीरीज, गोधरा कांड और 2002 के दंगे, इन चारों का इम्तिहान लेते हैं। इस फिल्म के दिल को चीर कर रख देने वाले फिनाले आप के दिल को न छुए उसके लिए आप के दिल को पत्थर का होना पड़ेगा। फिल्म की ज्यादातर सफलता इसके स्टार्स और मज़बूत सपोर्टिंग एक्टर्स में छुपी है, जैसे ओमी के बिट्टू मामा के किरदार में मानव कौल, वहीं इसके तीनों लीड्स मानो अपने-अपने किरदार में घुस से जाते हैं। बेहद शानदार एक्टर राजकुमार यादव, गोविंद के किरदार में एक अजीब सा जादू लेकर आते हैं, अमित साध अपने किरदार के अंदर की लड़ाई को बखूबी पर्दे पर दर्शाते हुए उसमें जान डालते हैं। पर वो सुशांत सिंह राजपूत हैं जो इशान के किरदार में अपना डेब्यू कर रहे हैं, और उन पर से अपनी आंखे हटाना मुश्किल है। वो स्क्रीन पर अपनी छाप छोड़ते हैं और उनका आत्मविशवास देखकर पता चलता है कि बॉलीवुड को एक नया स्टार मिल गया है। ‘काई पो चे’ की बेहतरीन म्यूजिक और कपूर के बेहतरीन डायरेक्शन का साथ आपका दिल जीत लेगी। मैं ‘काई पो चे’ को पांच में से चार स्टार देता हूं। इस साल के दूसरे महीने में ही, साल की बेहतरीन फिल्मों में से एक आपके सामने है।

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